महान वक्तियों के अनमोल विचार
1.एक किताब, एक कलम ,एक बच्चा और एक गुरु पूरी दुनिया को बदल सकते हैं।( मलाला यूसुफजई)
2. कोई भी पुरुष तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक उसे किसी महिला का साथ ना मिले चाहे वह मां हो अथवा पत्नी । ( गॉडफ्रे विन)
3.हमारे आसपास तब तक भौतिक अथवा बौद्धिक विकास नहीं हो सकता, जब तक हम उस दिशा में कार्य ना करें । (केल्विन कूलिज)
4.तैयारी कठिन परिश्रम और विफलता से सीख लेकर नतीजे अपने पक्ष में किए जा सकते हैं।(कालीन पावेल)
5.जो व्यक्ति कभी संघर्ष करने से पीछे नहीं हटता उसके लिए जीत हमेशा संभव होती है। (नेपोलियन हिल)
6.हम प्राकृतिक आपदाओं को नहीं रोक सकते मगर ज्ञान से अपने कंधे जरूर मजबूत बना सकते हैं ।
(पेट्रा नेमकोवा)
7.दुनिया जितनी तेजी से बदल रही है,उसमें जोखिम न लेने की रणनीति के विफल होने की पूरी गारंटी है ।
( मार्क जुकरबर्ग)
8.समझौता ऐसी तकनीक है जिसका प्रयोग तभी किया जाता है, जब हम लाभ की स्थिति में होते हैं
(जान वॉल्टन)
9.बहुमत अपनी ताकत बढ़ाने में निहित नहीं है, बल्कि इसका अर्थ है, मिली ताकत को महान कार्य में बदलना।
(जान बैनर)
10.अच्छे विचार स्वतः नहीं अपनाए जाते। यदि उन्हें अमल में लाना है,तो धैर्य रखिए और साहस जुटाइए ।
( हायमैन रिक ओवर)
11.सोने चांदी के सिक्के नहीं बल्कि स्वास्थ्य ही हमारी असल पूंजी है इसकी रक्षा अनिवार्य है ( महात्मा गांधी)
12.किसी भी संवाद का खूबसूरत पक्ष यही है कि उसमें वह बात भी समझ ली जाए, जो न कहीं गई हो
(पीटर ड्रकर)
13.शिक्षा मानव जीवन का एक ऐसा मजबूत हथियार है जिसकी सहायता से पूरी दुनिया बदली जा सकती है।
(नेल्सन मंडेला)
14.मिट्टी बहुमूल्य संपदा है और किसानों की उत्पादन क्षमता मिट्टी के स्वास्थ्य पर टिकी है।( वारेन बफेट)
15.हर व्यक्ति अपनी छवि के अनुसार अपनी दुनिया रचता है। वह चुनने का अधिकार तो होता है, पर भागने का नहीं । (आयन रैंड)
16.किसी भी देश में मजबूती और विकास तभी आता है जब उसके लिए लगातार कोशिश और संघर्ष जारी रखा जाए। (नेपोलियन हिल)
17.प्रवीणता के अलावा और कुछ नहीं है जो किसी के अंदर आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का निर्माण कर सकें । ( थॉमस कार्लाइल)
18.किसी भी राष्ट्र के लिए आतंकवाद के खात्मे से इतर कोई भी बड़ा उद्देश्य नहीं होना चाहिए। (जान अशक्राफ्ट)
19.कोई भी राष्ट्र यदि अपनी मिट्टी को नष्ट करता है, तो समझिए कि वह अपने पांव पर कुल्हाड़ी मार रहा है
(फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट)
20.निंदक व्यक्ति को हर चीज की कीमत तो मालूम होती है लेकिन मूल्य किसी का नहीं । (ऑस्कर वाइल्ड)
21.जिनके नहीं भी शक्तियों से चाहे वह दैवीय हो या मानवी अगर हमने कुछ प्राप्त किया है तो उनके प्रति कृतज्ञता जताना हमारा धर्म है। (लोकमान्य तिलक)
22.कुशल नेतृत्व का मतलब है कि राज्य में आम लोगों के लिए बनी व्यवस्था को बेहतर बनाना । ( सैम हॉस्टन)
23.क्रिकेट अन्य खेलों की तरह ही एक सामान्य खेल है, इसका आनंद भी तभी तक ले सकते हैं जब तक यह सामान्य बना रहे । (शेन वॉर्न)
24.नेतृत्व की कसौटी किसी चुनाव का परिणाम नहीं है ,बल्कि यह समय के सदुपयोग में मापी जाती है
(मार्को रूबियो)
25.बजट बताता है कि हम कौन-कौन सी वस्तुएं खरीदने में समर्थ हो सकते हैं यह उसे खरीदने से हमें रोकता नहीं । (विलियम फादर)
26.अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार का नजरिया हमेशा कुछ बधें बंधाए मुहावरों तक ही सीमित होता है ।
(रोनाल्डो रीगन)
27.जंगल में रहने वाली कोई चिड़िया पिंजरे पसंद नहीं करती उसकी चाहत तो बस खुला आसमान है।
( हेनरिक इब्सन)
28.बदलाव के बिना विकास संभव नहीं ।जो अपनी मानसिकता नहीं बदल सकते, वह बदलाव के वाहक नहीं बन सकते । (जॉर्ज बर्नार्ड शा)
29.मुझे हिंसा पसंद नहीं क्योंकि इसके सुखद परिणाम अस्थाई होते हैं जबकि इससे होने वाली क्षति अस्थाई होती है । (महात्मा गांधी)
30.किसी चेहरे का सबसे खूबसूरत पक्ष यही है कि वह दूसरे को खुद से कितना जोड़ पाता है ।
(जॉर्ज हरबर्ट मीड)
31.अच्छी नीति का मापक यही है कि वह कितने चेहरे पर मुस्कुराहट ला सकी । बुझे चेहरे और नम आंखें नीतियों की विफलता है। ( राउल रूज)
32.वैश्विक नेताओं को समझना चाहिए कि भविष्य सिर्फ स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा का है। (अर्नाल्ड श्वार्जनेगर)
33.सच्ची अहिंसा मृत्यु शैया पर भी मुस्कुराती रहेगी। अहिंसा ही वह एकमात्र सकती है जिससे हम शत्रु को अपना मित्र बना सकते हैं और उसके प्रेम पात्र बन सकते हैं । ( महात्मा गांधी)
34.नेता वही है जो राष्ट्र के लिए बेहतर रास्ता जानता है ।उस पर चलता है और पथ प्रदर्शक बनता है ।
(जान सी मैक्सविल)
35.ईश्वर अगर नहीं है तो उसके खिलाफ इतनी दलीलें और सुबूत देने की क्या जरूरत है ।जाहिर है हम जाने-अनजाने उसका रौब मानते हैं ।(स्वेतलाना)
36.कृषि कार्य मात्र फसलों का उत्पादन नहीं है बल्कि यह हमारे जमीन और हमारे जल स्रोत का पोषक भी है ।
(एलएन सेवरी)
37.सफलता का सबसे बुरा अनुभव उन दोस्तों की पहचान करना है ,जो आपकी सफलता से वास्तव में खुश हो (बिटे मिडलर)
38.धर्म के लिए तीर्थ स्थल की जरूरत नहीं है,हमारा मस्तिष्क, हमारा दिल ही मंदिर है और दयालुता ही इसका दर्शन। ( दलाई लामा)
39.दिल जीतने का यही तरीका है कि आप जहां भी जाएं वहां उबाऊ न बने और खूबसूरत वेशभूषा अपनाएं ।(पेरिस हिल्टन)
40.दोस्त वह होता है जो आपके बारे में सब कुछ (चाहे अच्छा हो या बुरा) जानने के बाद भी आप से मोहब्बत करता है। (एल्बर्ट हब्बर्ड)
41.राजनीति एक ऐसी कला है जिसके माध्यम से आप अपने आसपास के हालात को नियंत्रण में रखते हैं ।
(हंटर एट थाम्पसन)
42.अच्छे विचार स्वतंत्र नहीं अपनाए जा सकते उन्हें धैर्य के साथ ही अपने जीवन में उतारा जा सकता है।
( हैमन रिकओवर)
43.शाश्वत लोकतंत्र में न्यायिक व्यवस्था मजबूत और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होनी चाहिए ।
(आंग सान सू की)
44.राजनीति बिना खून खराबे के होने वाला युद्ध है , जबकि खून खराबे के साथ होने वाली राजनीति ।
(माओ त्से तुंग)
45.अगर हम काफी अरसे तक बदलाव नहीं ला सके, तो हमें खुद को बदलने की चुनौती भी स्वीकार करनी चाहिए।( विक्टर फ्रैंकल)
46.सबसे महान और सबसे मजबूत आंदोलन की शुरुआत हमेशा धीमी गति से होती है । ( कार्ल रोजर्स)
47.उत्सव वैविध्य को प्रोत्साहित करते हैं पड़ोसियों में संवाद स्थापित करते हैं और रचनात्मकता बढ़ाते हैं ।
(डेविड विंडर)
48.हिंसा से सामाजिक न्याय नहीं हासिल कर सकते क्योंकि वह अन्याय के अच्छे विचार को खत्म कर देती है । (पोप जॉन पॉल द्वितीय)
49.एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए एक सभ्य समाज का होना बेहद जरूरी है । ( चार्ल्स पिकरिंग)
50.असफलता का स्वाद चखने के बाद ही यह पता चलता है कि अगली बार हमें क्या नहीं करना है ।
(एंथनी जे डीएंजेलो)
51.गठबंधन तभी स्थिरता प्रदर्शित करता है, जब वह वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करता है ।
( स्टीफन किंजर)
52.प्रवीणता के अलावा और कुछ नहीं है जो किसी के अंदर आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का निर्माण कर सकें । (थॉमस कार्लाइल)
53.पड़ोसी उपन्यास की तरह होता है अगर अच्छा हुआ तो अंत तक उसके साथ रहते हैं और बुरा हुआ तो जल्दी ही छोड़ देते हैं (हेनरी ब्रुक)
54.इंसान के अंदर ही शांति का वास होता है उसे बाहर ना तलाशे (गौतम बुद्ध)
55. जब तक तुम स्वयं पर विश्वास नहीं करते, परमात्मा में विश्वास कर ही नहीं सकते – (विवेकानंद)
56.प्राण देकर भी मित्र के प्राण की रक्षा करनी चाहिए। – (बाणभट्ट)
57.अभिव्यक्ति की कुशल शक्ति ही तो कला है। –
(मैथिलीशरण गुप्त)
58.कला प्रकृति की सहायता करती है और अनुभव कला की. – (टामस फुलर)
59.पिता की सेवा अथवा उनकी आज्ञा का पालन करने से बढ़कर और कोई धर्माचरण नहीं है.-(वाल्मीकि)
60.पहले आपको खुद बदलना होगा, जैसा की आप दुनिया को देखना चाहते है। – (महात्मा गांधी)
61.कोई भी व्यक्ति तुम्हें बिना तुम्हारी सहमति के हीनता का अनुभव नहीं करा सकता. – (ऐना एलेना रूज़बेल्ट)
62.लोगों के लिए उदाहरण स्थापित करना दूसरों को प्रभावित करने का एकमात्र साधन है। –(अल्बर्ट आइंस्टीन)
63.बालकों में उत्सुकता तो ज्ञान की भूख मात्र है. – (जान लॉक)
64.हमे एक दूसरे के साथ चेहरे पर मुस्कान के साथ मिलना चाहिए क्योंकि यही से प्यार की शुरुआत होती है। -(मदर टेरेसा)
65.वन की अग्नि चंदन की लकड़ी को भी जला देती है अर्थात दुष्ट व्यक्ति किसी का भी अहित कर सकता है। – (चाणक्य )
66.अति संघर्ष से चंदन में भी आग प्रकट हो जाती है, उसी प्रकार बहुत अवज्ञा किए जाने पर ज्ञानी के भी हृदय में भी क्रोध उपज जाता है।- – महर्षि वाल्मीकि
67.जीवन में सदैव सुख ही मिले यह बहुत दुर्लभ है। – (महर्षि वाल्मीकि)
68.उड़ने की अपेक्षा जब हम झुकते हैं तब विवेक के ज्यादा नजदीक होते हैं.- (विलियम वर्ड्सवर्थ)
69.माता-पिता की सेवा और उनकी आज्ञा का पालन जैसा दूसरा धर्म कोई भी नहीं है। – (महर्षि वाल्मीकि)
70.कभी कभी हमें स्वयं को बताने की यह जरूरत पड़ती है की हम दूसरों को क्या दे सकते हैं। -(डॉ फिल)
71.यदि किसी युवती के दोष जानना हो, तो उसकी सखियों में उसकी प्रशंसा करो. -(बेंजामिन फ्रैंकलिन)
72.अहंकार मनुष्य का बहुत बड़ा दुश्मन है। वह सोने के हार को भी मिट्टी का बना देता है।-(महर्षि वाल्मीकि)
73.सज्जनों का धन तो धैर्य ही है। -(बाणभट्ट )
74.जो अंतर को देखता है, बाह्य को नहीं, वही सच्चा कलाकार है। –( महात्मा गांधी)
75.जो आदमी सच्चा कलाकार है, वह स्वार्थमय जीवन का प्रेमी हो ही नहीं सकता। – (प्रेमचंद)
76.अपने आप को खुश करने का सबसे अच्छा तरीका है, किसी और को खुश करने की कोशिश करना। – (मार्क ट्वेन)
77.संसार में ऐसे लोग थोड़े ही होते हैं, जो कठोर किंतु हित की बात कहने वाले होते है। –( महर्षि वाल्मीकि)
78.बिना उत्साह के कभी किसी उच्च लक्ष्य की प्राप्ति नहीं होती –(एमर्सन)
79.विश्व के इतिहास में प्रत्येक महान और महत्वपूर्ण आंदोलन उत्साह की सफलता हैं। – (एमर्सन)
80. इंसान जितना चुप रहने का प्रयास करेगा उतना ही उसके सफल होने का दायरा बढ़ेगा ।
(कृष्ण कपूर kmg)
81.जिस प्रकार हम अपने शरीर की रक्षा हर एक आपत्ति से करते हैं, ठीक उसी प्रकार हमें अपनी शिक्षा की भी रक्षा करनी चाहिए। जब तक हम शिक्षा से जुड़े हैं। (कृष्ण कपूर kmg)
महाभारत के कुछ महत्वपूर्ण विचार
ये सुविचार लेखक महाभारत का अध्ययन करने के पश्चात विचारो को सुव्यवस्थित करने का प्रयास किया है।
1.जिसके पास योग्यता होती है वो दिव्यता को जान लेता है। जो स्वयं को योग्य मानता है उसमें कहा योग्यता होती है । योग्यता का तो असली परिणाम परीक्षा लेने वाला ही देता है। (इंद्र अर्जुन से)
2.सुगंध दुर्गंध और मनुष्य का स्वभाव कभी नहीं छुप सकता । (शकुनी)
3.मनुष्य की महत्वाकांक्षाओं के मार्गों में सबसे बड़ा अवरोध उसके मन की लालसा है । (शकुनी)
4.छल अगर धर्म के लिए हो तो किया गया चल भी धर्म होता है ( वासुदेव कृष्ण)
5.अज्ञानी जब मूल्य जानने को सज्ज न हो, ज्ञान पर दृष्टि डालने पर भी सज्ज न हो तो दया ही दण्ड है ।
(वासुदेव कृष्ण )
6.सभी कर्म कार्य हैं पर सभी कार्य कर्म नहीं ।
(कृष्ण अर्जुन से)
7.जो व्यक्ति अपने कार्यों से आशा और इच्छा नहीं रखता उसके कार्य पूर्ण होते हैं । (कृष्ण अर्जुन से)
8.एक असफलता से दुखी होकर, जिसका मन डोलता नहीं, एक सफलता से आनंदित होकर जो सर्वश्रेष्ठ नहीं माना ऐसे व्यक्ति को कर्मयोगी कहते हैं । वह जीवन में बराबर सफल होता है। ( कृष्ण अर्जुन से)
9.परमात्मा ही सब कुछ है ।परमात्मा का सेवा कुछ भी नहीं है। जो अपनी आत्मा का दर्शन कर लेता है, वह परमात्मा का दर्शन कर लेता है ।जैसे नमक के एक कण का स्वाद समस्त सागर के स्वाद से विभिन्न नहीं होता वैसे ही आत्मा का दर्शन परमात्मा के दर्शन से भिन्न नहीं होता अर्थात आत्मा का दर्शन ही परमात्मा का दर्शन है ।(कृष्ण अर्जुन से)
10.धर्म अधर्म से जब मिल जाता है तो भविष्य नष्ट कर देता है ।( शकुनि दुर्योधन से )
11.त्याग धर्म का प्रथम आधार है ।(कृष्ण अर्जुन से)
12.आत्मा से आज्ञा या आदेश नहीं निकलता। आत्मा से केवल शाप या आशीर्वाद निकलता है।
( कृष्ण अर्जुन से)
13.जो व्यक्ति यह जान लेता है कि वह स्वयं कुछ नहीं
करता उसी के हाथों कई महत्वपूर्ण कार्य होता है ।
(कृष्ण अर्जुन से)
14.समर्पण भक्ति का प्रथम चरण है।( कृष्ण अर्जुन से)
15.शत्रु को निर्बल मानने वाला योद्धा पराजित होता है ।
(कृष्ण भीम से)
16.मनुष्य को अपना विजय अपने पुरुषार्थ से प्राप्त करना चाहिए । (कृष्ण पांचाली से )
17.जब कोई व्यक्ति कुछ पाने के लिए ही ज्ञान प्राप्त करता है, तो वह जीवन भर कठोर परिश्रम करता है।और उसे कुछ नहीं प्राप्त होता है । (कृष्ण कण से)
18.पुत्र को अपने सम्पूर्ण कर्म का फल तभी प्राप्त हो जाता है, जब उसके पिता उसके पुरुषार्थ का बखान करते हैं।(कृष्ण अभिमन्यु से)
आध्यात्मिक संबंधी महत्वपूर्ण बातें
1.सिमरन से हृदय के साथ-साथ सोच को भी विशालता मिलती है।
2.सेवा द्वारा सब तरह के दुखों का स्वत:नाश हो जाता है।
3.धर्म परिवर्तन नहीं भावना परिवर्तन जरूरी है।
4.वर्तमान धैर्य संतोष अथवा श्रद्धा से व्यतीत करें भविष्य की चिंता ना करें।
5.तन मन धन पर अभिमान ना करते हुए साध संगत में दौड़ दौड़ कर जाएं।
6.उत्तम ज्ञान के साथ उत्तम कर्म भी जरूरी है।
7.सेवा एक ऐसी चाबी है जिससे सतगुरु के भरपूर खजाने से जो चाहे ले सकते हैं।
8.अमन शांति अहिंसा और सहनशीलता संत के आभूषण होते हैं।
9.धर्म वह प्रक्रिया है ,जिससे मनुष्य वास्तव में मनुष्य बनता है।
10.पवित्र विचारों से ही पावन कर्म जन्म लेते हैं।
11.जो भक्ति से संबंधित गुणों को धारण करता है वही भक्त कहलाता है।
12.सहनशीलता, विशालता, विनम्रता व संतुष्टि को जीवन का आधार बनाएं।
13.यदि मन सतगुरु को समर्पित हो तो मन में सबके लिए प्यार ही प्यार होगा।
14.भाषा वेशभूषा, कौम, देश आदि सीमित एकता संपूर्ण नहीं मानव एकता होनी चाहिए।
15.भक्ति से मन स्वच्छ रहता है इसलिए मन भक्ति में लगाना चाहिए।
16.सत्ता के लिए प्रेम नहीं बल्कि प्रेम की सत्ता होनी
चाहिए
17.वैर , ईर्ष्या, नफरत,घृणा, लोभ,लालच आदि खरपतवार को मन रूपी धरती से उखाड़ फेंकें।
18.कुछ भी बनो मुबारक है पहले सब इंसान बनो।
19.कर्म ही विवेकशील, ज्ञानी, चरित्रवान, संतोषी और
सज्जन होने का प्रमाण देता है।
20.ज्ञान रूपी दौलत हो तो जीवन की खूबसूरती बनी रहती है।
21.जो मन अभिमान में चूर होते हैं वो गुणों की ओर नहीं बढ़ते।
22.केवल चलने से प्रगति नहीं होती दशा और दिशा भी देखनी पड़ती है।
23.ऊंचाइयां हासिल करने के लिए निष्ठा और लगन जरूरी है।
24.परमात्मा अचल है इसके एहसास से मन को ठहराव मिलता है।
25.सहनशीलता कमजोरी नहीं बल्कि बल का सूचक है।
26.अंधकार भले ही सदियों पुराना क्यों ना हो एक छोटे से दीपक के सामने टिक नहीं सकता।
27.त्याग और लगाव से ऊपर उठकर जिंदगी जीना भक्ति की असलियत है।
28.तप ,त्याग, और बलिदान मानवता के सुंदर आभूषण हैं।
29.मन की आग पानी से नहीं गुरु के ज्ञान से ही बुझती है।
30.मन की अवस्था ही इंसान को भक्त या राक्षस बनाती है।
31. आत्म तत्व की पहचान से जिसका विवेक जग जाता है ,वही सच्चा ज्ञानी कहलाते हैं।
चेतना का मतलब चतुराई नहीं जागरूकता है।
32.सुमिरन से आध्यात्मिक शक्ति बढ़ जाती है।
33.परमात्मा ही प्रेम का शाश्वत स्रोत है।
34.प्रेम देना सीख लें तो यह दुनिया शांतिपूर्ण दुनिया हो
जाए।
Krishn Kapoor Kmg