सुंदर जीवन साथी
पात्र-परिचय
रोजर- यह एक किसान का लड़का है जो अपनी स्नातक की पढ़ाई करने घर से बहुत दूर एक गांव में जाता है। क्यों कि इसका नाम जिस विद्यालय में लिखाया गया था वहां से बहुत करीब था। इसके पास एक ऐसी शक्ति थी कि जिससे ये किसी को अपने बस में कर लेता था और किसी के बड़ी से बड़ी शक्ति को चुटकी बजा के खत्म कर देता था।
गिन्नी- यह एक मध्यम वर्ग की लड़की थी। जिसके पापा प्राइवेट कार्य करते थे। जिसे रोजर बहुत मानता था। गिन्नी बहुत खूबसूरत थी। गिन्नी की शादी रोजर से हो जाती है ।
ओलिविया- यह गिन्नी के घर के बगल की एक लड़की थी। गिन्नी जो भी कहती थी ओलिविया वही करती थी। ओलिविया बहुत प्यारी थी। इसमें एक खास बात ये होती है की ये जिसको कुछ भी कह देती थी वो हो जाता था । सब इससे बहुत डरते थे। पर ये किसी को कभी डराती नहीं थी।
जूलिया- यह भी रोजर को उतना मानती थी की जितना गिन्नी रोजर को मानती थी। ये चारो मित्र में सबसे ज्यादा खूबसूरत थी।
ऐमी - ये सबसे समझदार थी, जो कुछ होने वाला होता है ऐमी सबसे पहले जान जाती थी। ये आगे चल के अपने जादू से रोजर को अपने बस में करने की कोशिश करती है।
मई जून का महीना था;सूरज ढलने वाला ही था,और उसकी लालिमा युक्त किरणे एक छोटे से बाग के कोने में बने कुछ कमरों की दीवारों पर पड़ रही थी।
कमरों की तादाद तीन थी,पर अत्यधिक सुशोभित हो रही थी।छोटी-बड़ी पक्षियों का एक समूह दूर-दूर से दाना चुन के अब वापस उस बाग (अपने-अपने) घर में आ रही थी, चारों तरफ पक्षियों की चहचहाने की आवाज गूंज रही थी।
कुछ बंदर,अजगर, ऐसे मिलजुल के खेल रहे थे मानो छोटे-छोटे बच्चे गांव में बड़े प्यार से छुपन छुपाई खेल रहे हो वहां का वातावरण मन को हर लेने वाला था।
उस बाग में बांस की खूंट के नीचे गिरे उसके सपोले सूखे पत्ते में सेमर,गुड़हल,और ढाक के फूल ऐसे प्रतीत हो रहे थे, मानो किसी मंदिर के आगे फूल माला बेचने वालो की कतार लगी हो।
थोड़ी दूर लगभग 100 से 200 मीटर के पास एक विशालकाय पीपल का वृक्ष था, जिसकी मंद-मंद हवाएं वहां के वातावरण में अमृत घोलने का कार्य करती थी।
रोजर को कमरों की तलाश थी रोजर घूमते घूमते उस बाग तक पहुंचा।
रोजर-देखा की कमरों के सामने एक शिक्षक कुछ बच्चों को शाम के वक्त कोचिंग पढ़ा रहे थे, शिक्षक बच्चों की छुट्टी कर देता है। फिर रोजर उससे कमरों की बात चलाता है।
किराए की बात किया तो टीचर बोले ठीक हैं;इन कमरों में से दो कमरा प्रयोग में है,एक खाली रहता है आप ही रह लेना फिर बात किराए तक पहुंची है तो टीचर बोला कैसा किराया कोई किराया नहीं रह लीजिए आप जब रहना चाहते हैं।
अब रोजर वहीं रहने लगा। और शाम के वक्त सब बच्चे कोचिंग पढ़ने आते तो रोजर को बहुत अच्छा लगता रोजर दिन भर अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद जब खेलने का मन करता तो कोई खेल नहीं खेल के उन छोटे-छोटे बच्चों के साथ बात करना पसंद करता था।
उस कोचिंग में LKG से कक्षा 10 तक के बच्चे आते थे।
उन्ही सब बच्चों में छोटी सी, प्यारी सी एक बच्ची थी। जो पढ़ने में काफी तेज थी, जो कक्षा तीन में पढ़ती थी। उसकी उम्र लगभग 11 साल की थी। उस वक्त रोजर की उम्र 16 साल की थी, उस बच्ची का नाम गिन्नी था रोजर का लगाव ज्यादा गिन्नी से था, और गिन्नी की सारी सहेलियों से भी।
अब क्या होता; हर वक्त वह कोचिंग पढ़ने आती, और रोजर भी उस बच्ची से मिलने के लिए तैयार रहता , और दोनो पास आने पे एक दूसरे से वार्तालाप करते।
रोजर कभी गिन्नी के बाल को सहलाता या कुछ प्रश्न पूछता जो वह पढ़ चुकी थी। यह प्रक्रिया लगभग 2 से 4 महीने चलता है कि कोचिंग पढ़ाने वाले टीचर को कुछ महीने के लिए कहीं जाना होता है, तो वह सारी जिम्मेदारी रोजर को सौंप के चला जाता है। ताकि उनके बच्चे कोई दूसरा कोचिंग क्लास ना करना शुरू करदे।
रोजर दिन में अपना क्लास करता और अब हर शाम सभी बच्चों को कोचिंग पढ़ाता अब रोजर और गिन्नी का लगाव कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था, और गिन्नी खूब अच्छे से पढ़ाई भी करती थी। गिन्नी के पास तीन और सहेलियां भी थीं कुल मिलाकर वह चार सहेलियां हो गई थी, और सब एक साथ अध्ययन करते थे जिनमें
जूलिया,एमी,ओलिविया, नाम की उसकी सहेलियां थी। अब रोजर जिस दिन से उन बच्चों को पढ़ाने लगा है, उसको उन बच्चों के साथ बहुत अच्छा लगता है। रोजर बोलता है इन्हीं बच्चों के बहाने मेरा भी वक्त गुजर जाता है।
अब समय बदल चुका था। गर्मी का वक्त बीत चुका था।
ठंडी आने का कुछ ही दिन बाकी था, सब लोग सुबह,शाम साल स्वेटर का इस्तेमाल धीरे-धीरे कर रहे थे।आखिरकार क्या होता पढ़ाने वाली प्रक्रिया चलती रही। ठंडक काफी तेज होने लगी।
अचानक ऐसा हुआ कि जो पहले कोचिंग पढ़ाता था अब उसकी मृत्यु हो गई।
रोजर बहुत दुःखी होता है और सब कोचिंग के बच्चे भी।
फिर क्या होता अब कोचिंग रोजर को ही पढ़ना पड़ा।
सब बच्चे अब रोजर से ही कोचिंग पढ़ते।
शीतकालीन ओशो और कुहासों से भरा नवंबर वातावरण के सभी पेड़ पौधो और घरों को अपने आगोश में ले रहा था।
सब प्रतिदिन कांपते-कांपते कार्य को करते थे। कोचिंग के बच्चे काफी छोटे होने के कारण उनकी एक महीने तक की छुट्टी करनी पड़ी। अब रोजर अकेला उस अकेले बाग में रहता फिर एक दिन छुट्टी के बीच ही वह भी अपने घर चला जाता है। बच्चों से इतना लगाव हो गया था कि रोजर को कुछ अच्छा नहीं लगता था। ठंडक काफी थी। वह पुनः अपने घर से वही अपने कमरे में चला जाता है। और अब महीना भी पूरा हो चुका था, फिर सारे बच्चे स्वेटर,टोपी, साल, से लदे जब एक जगह बैठते थे; तो ऐसा लगता था कि मानो सब रंग बिरंगे फूलों के गुच्छो के ढेर को कई भाग में करके रख दिया गया हो। बच्चे उस हरे-हरे बाग में बहुत सुशोभित होते थे। कई दिन बाद सब मिले थे,तो सब अपनी-अपनी कहानी बता रहे थे।
जूलिया-मेरा मन नहीं लग रहा था, घर पर कोई बुलाता कुछ करने को तो मुझे कुछ अच्छा नहीं लगता, मैं कुछ कुछ दूसरा कर देती थी। मैं सोचती थी की रोजर सर को कहां देख लूं।
एमी- मैंने पूरे महीने अच्छे से खाना भी नहीं खाया।मुझे सिर्फ आप की याद आ रही थी।
ओलिविया - आप की फोटो मेरे चाचा के मोबाइल में थी,चाचा को कुछ पता नहीं था मैं आप को वही पे देख लेती थी।
रोजर - वो तुम सब बहुत प्यारे हो। हमे भी आप सब की बहुत याद आती थी, मैं भी छुट्टी के बीच में घर चला गया था 2 ही दिन था । कुछ अच्छा नहीं लग रहा था। न खाना खाने का मन करता था न नींद आती थी। फिर देखो तभी घर से चला आया था ।
सब अपनी अपनी व्यथा सिर्फ एक महीने के बिछड़न में बता रहे थे।उधर से चाकलेट वाला टोकरी में रंग बिरंगी ताफियां ले के आ जाता है,
छोटे-छोटे बच्चे अपना ध्यान चाकलेट के ऊपर लगा देते हैं। फिर रोजर सब बच्चों के लिए चाकलेट और कुछ टाफी खरीद के दे देता है।
पहले सब खाते हैं; फिर उनको पढ़ाता है,गिन्नी पढ़ने में काफी अच्छी थी रोजर का लगाव उससे ज्यादा थी।
फिर 28 दिसंबर को गिन्नी का जन्मदिन होता है। पूरी तैयारी रोजर कोचिंग पर ही कर लेता है,सारी प्रक्रियाएं होती हैं और उसका बर्थडे अच्छे से मनाया जाता है। गिन्नी बहुत खुश होती हैं और उस दिन गिन्नी के मुख में ढेर सारा केक
लगा होता है,और रोजर से बहुत ढेर सारी फोटो खींचने को कहती हैं। फिर गिन्नी का मन होता है, जैसे सब के शादी विवाह का एक एल्बम होता है, उसी तरह उसके बर्थडे का भी एक एलबम रहे। रोजर भी एक बहुत बड़ा एल्बम बनवा के गिन्नी को देने का वादा करता है।
इधर नया साल 2019 अपने साथ रंग-बिरंगी खुशियां लिए हुए, खट्टी मीठी यादों को नया और पूरा करने के लिए वक्त का इंतजार कर रहा था।
फिर सुबह नया साल नई किरणों के साथ नई खुशबू लिए हर खुशियां बिखेर रहा था। अब सब बच्चे कोचिंग में आते पर नए साल की बधाई देने के लिए एक दूसरे से कुछ शायरियां, तो कुछ नए प्यारे-प्यारे गिफ्ट बना रहे थे।गिन्नी भी एक प्यारा सा गिफ्ट लाती है, साथ में कुछ शायरियां भी। सब बच्चे रोजर को हैप्पी न्यू ईयर के साथ गिफ्ट देते हैं, रोजर भी सभी को खूब बधाई देता है, और सब से बहुत खुश होता है। गिन्नी आखिरी वक्त में रोजर को गिफ्ट देती हैं। शाम हो चुकी थी गिफ्ट को रोजर वहीं खोलने लगता है। गिफ्ट को खोलने के बाद भी कुछ ऐसा नहीं दिखता था कि क्या है,पर कुछ चॉकलेट थे जो दोनों मिलकर खाएं और अपने घर चली जाती हैं गिन्नी बहुत खुश थी
तब से गिन्नी के लिए रोजर कुछ ना कुछ जरूर लाता और गिन्नी भी बड़े खुशी के साथ स्वीकार कर लेते थे उसकी सारी सहेलियां जूलिया,एमी,ओलिविया, उससे नाराज होने लगी।बोली वह आपको सिर्फ मानते हैं हम सबको नहीं।
फिर अगले दिन भी यही प्रक्रिया होती है, तब गिन्नी बोली आप मेरे लिए जो लाते हो ना लाया करो या तो मेरी तीन और सहेलियों के लिए लाया करो फिर रोजर बोला कोई बात नहीं मुझे पता नहीं था, मैं आप सबके लिए लाऊंगा। फिर जो भी लाता चारों के लिए; सब बहुत खुश थे,और एक दूसरे से बहुत प्रेम करते थे।
गर्मी अपने कदमों को फिर से जमीन पर रखने वाली ही थी कि ऐसे सुहावने मौसम में गिन्नी और उसकी तीन और सहेलियां रोजर के साथ बैठकर मस्ती कर रही थी।सब एक दूसरे की कमियां बता कर आपस में खूब हंस रहे थे।
गिन्नी-अचानक रोने लगती हैं,
ओलिविया - घबरा के उससे पूछती हैं क्या हुआ गिन्नी क्यों रो रही हो।
रोजर- क्यों बाबू क्यों रोने लगे आप बोलो।
गिन्नी- आपके साथ कितना अच्छा लग रहा है, पता नहीं जब आप हम सब को छोड़कर चले जाएंगे तो कौन हम सबको इतना प्यार देगा। मैं तो एक पल नहीं रह पाऊंगी,
जूलिया- प्लीज हम सब से वादा करो आप कभी छोड़ कर तो नहीं जाएंगे। अगर जाएंगे तो फिर मिलने जरूर आते रहेंगे न।
रोजर- इतनी सी बात पर रोने लगे वो हा हा हा हा हा हा पागल तुम सबको कभी छोड़कर नहीं जाऊंगा ठीक है, गिन्नी के सिर को प्यार से पकड़ के अपने सीने से लगा कर चुप कराता है। और बोलता है आप सब कभी रोना मत हम हर वक्त आपके पास रहेंगे।
ओलिविया- आपकी जब याद आएगी तो आपको जब बुलाएंगे तो आओगे ना।
रोजर- हां क्यों नहीं जरूर आएंगे।
एमी और ओलिविया- सर, सर कल चिल्ड्रन डे है। आप मनाएंगे न।
एमी - हम सब इतने छोटे-छोटे होते हुए भी टीचर डे मनाते हैं।
रोजर- ठीक है आप सब तैयारी करके आना कल यहीं पर चिल्ड्रन डे मनाया जाएगा।
सब बच्चे एक साथ निकलते हुए,शोर मचाते हुए बोलते हैं या या या या……..
हवाएं ठंडक को अपने आगोश में लिए हुए वातावरण में तेजी-तेजी से झूला झूला रहा था। जिससे लोगों के दांत
कटकटाने की आवाज कलेजा दहला देता था। लोक स्वेटर पे स्वेटर पहने हुए थे। अगले दिन फिर जब शाम को बच्चे कोचिंग आते। सब तैयारी हो चुकी थी,सब बच्चे मिलकर चिल्ड्रन डे को मना रहे थे। कोई गरम-गरम समोसे तो कोई पकौड़ा बेच रहा था। छोटे-छोटे प्यारे बच्चों की तो एक लंबी कतार ही लगी थी। जिसमें कोई टॉफी,नमकीन तो कोई बिस्किट बेच रहा था।
रोजर- वाह तुम सब बहुत प्यारे लग रहे हो आज।
उस वक्त पांच के समोसे 10 में,और 6 के पकोड़े 12 में बेच रहे थे।छोटे मोटे बच्चे तो ₹1 की टॉफी 5 और 8 में बेच रहे थे ।
गिन्नी - घबरा के शर्मा के हंसते हुए बोली सर आप हम सबके लिए कोई और गिफ्ट नहीं लाए हैं। हम लोग आपको टीचर डे के दिन गिफ्ट तो दिए थे।
रोजर- क्यों नहीं लाया हूं बेटा 1 मिनट हां रोज एक कमरे में जाता है रोजर दौड़ते हुए फिर वापस गिफ्ट के ढेर सारे डब्बे और सैकड़ों काफी पर लेकर आता है।सब बच्चों को बारी-बारी गिफ्ट और काफी देता है।कुछ देर बाद मिठाई भी लाता है और सबको देता है,डब्बे में दो पीस मिठाई बची थी एक छोटी लड़की और एमी रह जाती हैं।
दोनों को मिठाई रोजर देता। और खुद नहीं पाता है।इस नजारे को गिन्नी ध्यान से देख रही थी।
गिन्नी- सर आप मेरे में से मिठाई खा लीजिए।
रोजर- नहीं बेटा कोई बात नहीं, यह आप सबके लिए था।
आप सब खा लिए तो हमने भी खा ली।
गिन्नी - नहीं आधा,थोड़ा सा प्लीज।
रोजर- ठीक है रोजर आधा खा लेता है। गिन्नी फिर रोजर का झूठा खाती है। और ठंडक काफी तेजी थी। रोजर 1 महीने की छुट्टी के साथ सब बच्चों को कोचिंग से छोड़ देता है,और सब बच्चे चले जाते हैं।
रोजर- गिन्नी आप क्यों रुके हो, बेटा जाओ घर ठंडक बहुत ज्यादा है।
गिन्नी- रोते हुए रोजर को देखती है। गिन्नी का मुख थोड़ा सा गुस्सा थोड़े से प्यार से आंसुओं में झलक रहा था।
रोजर- इस सब क्या बेटा हम मिलते रहेंगे क्यों रो रही हो। रोनेका नही ।
गिन्नी- आपकी याद आएगी ना तो।
रोजर- तो फोन कर लेना बात कर लेंगे। रोजरअपना नंबर दे देता है।
गिन्नी- खुश हो जाती है,और रोजर का पैर रखती है।
रोजर-गिन्नी के माथे को चूमता है और बोलता है तुम ही हो जो मेरा ख्याल रखती हो।
गिन्नी-अपने घर खुशी-खुशी चली जाती हैं।
रोजर भी कमरे में से अब अपने घर चला जाता है।
यह कहानी अब 7 साल बाद शुरू होती हैं जब गिन्नी 17 साल की हो गई थी। और रोजर उसी विश्वविद्यालय से पी एच डी कर रहा था उस वक्त रोजर की उम्र 21 साल थी।
जल्द ही आने वाली है….. द्वितीय भाग