Moral development of theory

                  

        CTET 2024-25 

मनोविज्ञान और शिक्षणशात्र 

 PSYCHOLOGY AND PEDAGOGY


नैतिक विकास का सिद्धांत

Moral development of theory 

लारेंस कोहलबर्ग


जर्मन मूल के अमेरिकी मनोवैज्ञानिक लॉरेंस कोहलबर्ग को नैतिक विकास के सिद्धांत के लिए जाना जाता है।

यह सिद्धांत उनकी प्रसिद्ध पुस्तक  

( The psychology of moral development ) 

से लिया गया है।

जीन पियाजे की तरह कोहलवर्ग का भी सिद्धांत कहानी कथन पद्धति 

( story telling method) से प्रेरित अर्थात इसमें कई काल्पनिक कहानियों का प्रयोग किया गया है जिसमें हिंज की दुविधा वाली कहानी सबसे प्रसिद्ध है।



हिन्ज की दुविधा कहानी का मुख्य सार – हिंज की पत्नी को कैंसर हो जाता है, हिंज उसके इलाज के लिए बहुत प्रयास किया आखिरकार उसके सभी पैसे खत्म हो गए । फिर डॉक्टर और भी महंगे महंगे दवा और इंजेक्शन लेने के लिए बोला। अब हिन्ज के पास पैसे नहीं थे। बीबी मृत्यु के सैय्या पर लेटे के बराबर थी। अब हिन्ज दवा चोरी करने के लिए निर्णय लिया और अपनी पत्नी को बचाने के बारे में विचार किया पर उसको अभी कुछ ठीक से समझ नही आ रहा था कि वो क्या करे यही दुविधा उसके मन में अनेक सवाल उत्पन्न कर रही थी।


       अर्थात अब मुख्य बिंदु की तरफ चले तो सब समझ जायेंगे।

इस कहानी को कोहलबर्ग ने 10 से 16 वर्ष के सिर्फ लड़को को सुनाया और कहानी पर कुछ प्रश्न किए और जिनका जो जो उत्तर आता था उसी अनुसार कोहलबर्ग ने नैतिक विकास के सिद्धान्त का वर्णन ने किया ।


कोहलबर्ग के इस सिद्धांत को समझने से पहले इनके इन तीन बातो को समझना बहुत जरूरी है। 


1 नैतिक दुविधा Moral Dilemma :- नैतिक विकल्पों A और B में से किसी एक का चयन करने के लिए पैदा हुई अस्मंजस की स्थिति नैतिक दुविधा कहलाती है।

जैसे :- पापा या पत्नी में से किसी के का चुनाव करना।

या हिंज़ को दवा चोरी करना चाहिए या नहीं।


2 नैतिक तर्कणा Moral Reasoning :- नैतिक विकल्पों A और B में से किसी एक का चयन करने के लिए होने वाले तार्किक चिंतन प्रक्रिया को ही नैतिक तर्कणा कहते हैं।

जैसे :- एक गर्भवती महिला के बच्चे को बचाया जाए या उस महिला को अब इसके लिए जो तर्क किया जा रहा है वही नैतिक तर्कणा है।

 या हिंज को को अपनी पत्नी को बचाना है अब वह यही सोंच रहा है मैं दवा चोरी करूं या न करूं यही नैतिक तर्कणा है।

3 नैतिक व्यवहार Moral Behaviour :- नैतिक तर्कणा के बाद चयनित विकल्प को व्यवहार में उतरना ही नौतिक व्यवहार है। या इसे ही नैतिक कार्यवाही कहते हैं।

जैसे :- नकारात्मक या सकारात्मक किसी पहलू में से एक का चयन कर लेना ।

हिंज ने अपने जीवन में अब चोरी वाले व्यवहार को अपना लिया अब वह चोरी करेगा इस बात का निर्णय ले लिया यही नैतिक व्यवहार है


या 

पिता या पत्नी में से किसी एक को चयनित कर के अपने व्यवहार का प्रदर्शित करना।


इस सिद्धान्त के कुल 3 स्तर हैं और हर एक स्तर के 2 चरण हैं कुल मिला के ये सिद्धान्त 6 चरणो का समावेशन है।

इसमें हर एक चरण हर एक आने वाले चरण को काट देगा यही क्रम आखिरी चरण तक चलेगा।

1 पूर्व नैतिक/ पूर्व परंपरावादी/ पूर्व प्रथागत स्तर Pre Moral / Traditional Level

(4से10 वर्ष)


इस स्तर को 2 चरणों में विभक्त किया गया है


A दण्ड एवम आज्ञापलन अवस्था Punishment and obedient


“कुछ भी सही-गलत नहीं है। बस वही कार्य गलत है किसके लिए दण्ड मिलता हो।”


जैसे इस में अगर हिंज को दवा चोरी नहीं करना चाहिए क्यों की अगर वह दवा चोरी करते हुए पकड़ा जाता है तो वह दंडित किया जाएगा।


B यांत्रिक सापेक्ष नैतिक Instrument Relativist Moral stage 

यांत्रिक= फायदा


“अगर कोई कार्य करना गलत भी है तो भी उसे करना चाहिए अगर कार्य करने में आप का फायदा हो रहा है तो।”

हिंज को दवा चोरी कर लेनी चाहिए क्यों कि दवा चोरी कर लेने से उसे दवा भी मिल जायेगी और उसकी पत्नी भी ठीक हो जाएगी।


2 नैतिक / रूढ़िवादी / प्रथागत अवस्था Moral Traditional Level 

(10 से 13 वर्ष )


A अंतर्वैक्तिक संबंध / वैक्तिक संबंध स्वीकृति Individual Relationships and Conformity 

“इस चरण को अच्छा लड़का या अच्छी लड़की अवस्था भी करते हैं।”

“भले ही कोई कार्य करने से फायदा न हो तो भी उसे कर देना चाहिए पर अगर कार्य करने से अच्छी छवि बनती है।”


जैसे :- भले ही दवा चोरी करने से उसे कोई फायदा हो या न हो पर उसकी पत्नी की जान जब उन चोरी की गई दवा से बच जायेगा तो पूरे गांव में एक अच्छा पति होने की एक अच्छी छवि बन जायेगी।


B कानून और व्यवस्था अवस्था / सामाजिक क्रम एवम व्यवस्था अवस्था Law And Order Stage 

“इसी चरण को सामाजिक क्रम एवम नियम बनाए रखना भी कहते हैं।”


“भले ही किसी काम को करने से व्यक्ति की छवि अच्छी बनती हो तो भी उसे नहीं करना चाहिए अगर वह कानून के नियमों के खिलाफ है।”


जैसे :- भले ही हिंज दवा चोरी कर के एक अच्छे पति बनने की छवि प्राप्त कर रहा है फिर भी उसे दवा चोरी नहीं करना चाहिए क्यों कि चोरी करना कानूनी अपराध है।


3 उत्तर नैतिक / उत्तर रूढ़िवादी / उत्तर प्रथागत अवस्था Past Moral Level 

13 से 16 वर्ष


A सामाजिक अनुबंधन अवस्था Social Contact stage

"भले ही कोई काम कानून की निगाह में गलत हो तो भी उसे कर देना चाहिए अगर वो समाज के हित सिद्ध हो रहा है।"


जैसे:- भले ही चोरी करके हिंज कानून तोड़ रहा है लेकिन उसे ऐसा करना चाहिए वरना इलाज न करने कारण अगर उसकी पत्नी की मृत्यु हो जाती है तो समाज में वह मुंह दिखाने लायक नहीं रह जाएगा।


B सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत Universal ethical principles  

भले ही कोई कार्य करने से सामाजिक बदनामी मिलती हो तो भी उसे कर देना चाहिए। अगर वो कार्य करने से मानवता का हित होता है। क्यों कि मानवता से बड़ी कोई नैतिकता नहीं है।


जैसे:- अगर हिंज के पत्नी की जगह दूसरे की पत्नी बीमार है तो भी उसे दवा चोरी कर लेनी चाहिए, भले ही चोरी करने से उसपर चरित्र हीनता का आरोप लगता है। क्यों कि जान बचाने से बढ़कर इस संसार में कोई मानवता नहीं हो सकती। मानवता के आगे चरित्रहीनता का आरोप बहुत तुक्ष है।


आलोचनाएं :- 

“अमेरिकी महिला मनोवैज्ञानिक कैरोल गिलिगन ने इस सिद्धांत की यह कहकर आलोचना की है कि इसने महिला की नैतिकता की अनदेखी की है।”

“गिलिगन मानती हैं कि पुरुषों की नैतिकता में न्याय अधिक होता है। उसने इस सिद्धांत में पुरुष प्रधान होने का आरोप लगाया है, इसमें स्त्रियों की नैतिकता को अनदेखा किया गया है।”


“कोहलवर्ग मानते थे कि उनका सिद्धांत दुनिया की सभी संस्कृतियों पर लागू होता है। जो कि संभव ही नहीं है अतः यह भी उनकी आलोचना है।”

“कोहल वर्ग ने माना है कि नैतिक तर्कणा और नैतिक कार्यवाही ( नैतिक व्यवहार ) में गहरा संबंध है। किंतु यह हमेशा सच नहीं होता। अतः यह भी एक आलोचना है।”



“इस सिद्धांत में नैतिकता चरणों पर निर्भर करती है (पर जीन पियाजे की नैतिकता परिस्थिति पर निर्भर करती है)”  


“यह सिद्धांत पियाजे की तरह विकास की अनिरंतरता को दिखता है।” 

जैसे:- पापा और हम जलेबी खा रहे थे तब तक एक भिखारी आया जलेबी लेकर भाग गया पापा के आंसू आ गए ये सोच के कि बेचारा भिखारी कब का कितना भूखा था सही हुआ ले गया जलेबी , रुकता तो और भी कुछ खरीद के देता । 

(क्योंकि पापा कोहलबर्ग के नैतिक विकास के चरण नंबर 6 पर है यहां पापा में सैवभौमिक नैतिकता है)


और मैं तो भिखारी को मारा एक डंडा क्योंकि मैं बच्चा था।

 (मैं चरण नंबर 1 पर हूं दण्ड एवम आज्ञापालन अवस्था में मैं हूं।) मेरे अंदर नैतिकता नहीं थी।


By कृष्ण कपूर Kmg 

KRISHN KAPOOR KMG

I am a writer. My First Book (Kalam A Pari) And second book (Pranay ki yatharthta). Village-Savargah, District-Ambedkar Nagar (Uttar Pradesh).

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