Manovigyana ka sampraday

 मनोविज्ञान का संप्रदाय

 संरचनावाद संप्रदाय :-विलियवुंट


संरचनावाद/ निर्मितवाद/ निर्मानावाद/ अंतःनिरीक्षणवाद/अस्तित्ववाद:-

"संरचनावाद विचाराधारा की शुरुआत 20वीं शदी के मध्य 'विलियमवुंट' (1832 से 1920) तथा टिचनर ने (1867 से 1927) के द्वारा हो जाती है।"

यह संप्रदाय 19वीं सदी के अंत में चेतना के मनोविज्ञान से निकलकर 20वीं सदी के मध्य मनोविज्ञान में एक संप्रदाय के रूप में छा जाता है, यह संप्रदाय मनोविज्ञान का प्रथम एवम सबसे पुराना संप्रदाय है।

विलियम वुंट 1832- 1920 :- इस संप्रदाय में वुंट यही कहते हैं कि हमारी जो चेतना है। किस-किस तत्व से निर्मित है और इस चेतन की संरचना कैसे हुई, इसमें किन-किन तत्वों का अस्तित्व विद्यमान है। 


"1879 ईस्वी में जर्मनी के लिपजिंग शहर में स्थित लिपजिंग विश्वविद्यालय में विलियम वुंट को दर्शनशास्त्र विभाग का HOD बना दिया गया और वहीं पर वुंट ने मनोविज्ञान की प्रथम प्रयोगशाला स्थापित किया और संरचनावादी विचारधारा की स्थापना की साथ ही साथ प्रयोगात्मक मनोविज्ञान को जन्म दिया।" 

(इससे पहले मनोविज्ञान केवल विचारों में थी।)


(2015 में लिपजिंग विश्वविद्यालय का नाम बदलकर कार्लमार्क्स विश्वविद्यालय कर दिया गया।)


स प्रकार वुंट ने संवेदना चेतन को समझने के लिए अंत:निरीक्षण विधि या अंतदर्शन विधि को जन्म दिया।

वैश्विक स्तर पर मनोविज्ञान का जनक वुंट को माना जाता है। 

संरचनावाद विचारधारा का जनक वुंट है 

अंतरदर्शन या अंत:निरीक्षण विधि का जनक वुंट है

प्रयोगात्मक मनोविज्ञान का जनक वुंट है 


वुंट चेतना को दो भागों में विभक्त किया है 


1.संवेदना 2.भाव 


संवेदना :- इंद्रियों द्वारा प्राप्त प्रथम अनुभव/ज्ञान अभ्यास

भाव  Feeling :- अच्छा- बुरा,  खट्टा- मीठा आदि के अनुभव को हम भाव कहते हैं।


जैसे :- H²O = मतलब H का एक O का 2 अणु से जल का निर्माण होता है यही संरचना या निर्माण ही संरचनावाद या निर्माणवाद की भी है।


जैसे :- भाव अचानक बाहर तेजी से मौसम बदल जाए और ठंड पड़ने लगे तो हमें सबसे पहले पंखा बंद करने की आवश्यकता पड़ेगी और गर्म कपड़े पहनने की जरूरत पड़ेगी यही भाव है। 

जैसे भाव रसगुल्ला देखा तो मन में सबसे पहले मीठा होने का भाव उत्पन्न हो जाएगा। 


एडवर्ड ब्रेडफोर्ड टिचनर (USA) 11 जनवरी 1867से 3 अगस्त 1927 

संरचनावादी टीचर विलियम वुंट के शिष्य एवं सबसे प्रिय सहयोगी थे जो उनके बाद 1892 ई0 में कार्नेल विश्वविद्यालय USA में संरचनावाद संप्रदाय की स्थापना की ।


बस संरचनावादी विचारधारा वुंट ने पहले दी और टीचर के गुरु भी थे इसीलिए उनको संरचनावादी विचारधारा का जनक या इस संप्रदाय का संस्थापक भी कहा गया।


किन्तु टिचनर को भी संरचनावाद संप्रदाय का संस्थापक माना गया ।

संरचनावाद संप्रदाय का विषयवस्तु :- 

चेतना :- हम जो इस चेतना अवस्था में बैठे हैं और सीख रहे हैं वही चेतना है।


टीचर ने चेतन तथा मन में अंतर किया।

चेतन :- वे सभी अनुभव जो व्यक्ति में एक दिए हुए क्षण में उपस्थित होते हैं  

मन :- वे सभी अनुभव जो व्यक्ति में जन्म से ही मौजूद होते हैं ।

टिचनर ने चेतना के तीन अंग बताएं हैं।

1 संवेदना 

2 भाव 

3 प्रतिमा 

1 संवेदना :- पांचो ज्ञानेंद्रिय द्वारा प्राप्त प्राथमिक ज्ञान ही संवेदना है। 

2 भाव :- मतलब feeling 

3 प्रतिमा /बिंब :- Affection/Image :- हमारे मन को किसी इंद्रियों द्वारा जो प्राथमिक ज्ञान प्राप्त होता है तुरंत इसकी प्रतिमा हमारे मन में बन जाती है वही बिंब या प्रतिमा है ।


जैसे :- बाहर अगर अदरक वाली चाय बना रही है तो हमारे ज्ञानेंद्रिय (नाक) द्वारा हमारे हमें पता चल जाता है फौरन हमारे मन में वह स्वादिष्ट अदरक वाली चाय का एक कप में भरे बगल में टोस्ट नमकीन का चित्र बन जाता है,यही प्रतिमा है।


सबका एक में उदाहरण है :- किसी को आंखों से देखना संवेदना है उससे हम खुश थे यह भाव उसे 10 साल बाद भी देखा और पहचान गया यही प्रतिमा है ।


संरचनावाद संप्रदाय की विशेषता:- 

1 मानव शरीर दोनों का अस्तित्व रहता है इसलिए से अस्तित्ववाद भी कहते हैं। 

2 शिक्षा को मानसिक क्रिया माना है अंतर दर्शन के द्वारा मन के विभिन्न क्रियो के अध्ययन का अध्ययन किया जाता है।

 3 संरचनावदियो ने चेतन व अनुभव पर बल दिया। 

4 इसमें अंत:निरीक्षण विधि तथा प्रयोगात्मक विधि की खोज हुई। 

5 भावना,विचार,प्रतिमा चेतन मानसिक क्रिया का अध्ययन किया जाता है। 

6 प्रायोगिक विधि को जन्म देने वाला संप्रदाय मनोविज्ञान के व्यवहार पक्ष/शुद्धता पर बल अर्थात मनोविज्ञान के नियम या तथ्यों की खोज पर बल दिया।


वॉलमैन के अनुसार :- संरचनात्मक मनोविज्ञान व्यक्ति के जीवन काल में घटने वाली मानसिक क्रियो का अध्ययन कहलाता है अर्थात मानव जीवन में जो घटना घटती है उसके मानसिक क्रिया का अध्ययन है








KRISHN KAPOOR KMG

I am a writer. My First Book (Kalam A Pari) And second book (Pranay ki yatharthta). Village-Savargah, District-Ambedkar Nagar (Uttar Pradesh).

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