जीवन परिचय :-
प्रारंभिक परिचय :-
कृष्ण कपूर कृष्ण कपूर kmgउर्दू,हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी जैसी साहित्यिक भाषाओं के लिए जाने जाते हैं। इन सभी भाषाओं में इनका मर्तबा बहुत बुलंद रहा है ।
कपूर जी एक प्लेटफार्मYour quote(yourquote) (योरकोट) पर आज भी एक लेखक के रूप में कार्यरत हैं ।
इन्होंने 2 साल तक 28 दिसंबर 2018 से 2020 तक ऑनलाइन एक पत्रिका "दास्तान ए हिज्र"चलाई । जिससे सभी लोगों तक बातें नहीं पहुंच पाती थी । फिर बाद में चलकर 3 मार्च 2021 को एक पुस्तक "कलाम ए परी" सहयोगी संपादक "कामरान अहमद खान" और "मोहम्मद अदनान" के माध्यम से Turbo Flash PublicationTurbo flash publications ( टर्बो फ्लैश पब्लिकेशन) से प्रकाशित करवाई ।
प्रारंभिक जीवन:-
कृष्ण कपूर का असली नाम 'कृष्ण कुमार' है ऐसा माना जाता है की साहित्यिक जगत में आने के बाद यह अपने नाम के साथ मुक्तसर (कलमी) नाम कपूर इस्तेमाल करने लगे , क्योंकि इनके खानदान में कुछ लोग इस मुक्तसर नाम (तखल्लुस) कपूर को इस्तेमाल करते थे। इसलिए उन्हें भी बहुत अच्छा लगा और वे भी कपूर इस्तेमाल करने लगे।
जीवन परिचय:-
कपूर का जन्म 5 जून 2001 को इनके नानी के घर ग्राम दुधई अंबेडकरनगर (उत्तर प्रदेश) में हुई ।उनकी प्रारंभिक परवरिश नानी के घर ही हुई । इनकी माता श्रीमती मीना देवी आजीविका मिशन की समूह सखी के पद पर कार्यरत हैं ,और पिता श्री घनश्याम जी एक किसान हैं। माता-पिता दोनों स्नातक तक की पढ़ाई की थी। कपूर के पास दो भाई और दो बहन हैं। जिसमे कपूर सबसे बड़े हैं।
और जब कपूर ने होश संभाली तो उनको उनके घर ग्राम सवरगह पोस्ट अम्बरपुर अंबेडकर नगर (उत्तर प्रदेश) में लाया गया ।
शिक्षा :-
कपूर की इब्तेदाई तालीम अम्बरपुर के एक प्राइमरी पाठशाला से हुई, और इनका लगाव बचपन से ही कलाओं, कृतियों और साहित्य से जुड़ा रहा।
प्राइमरी शिक्षा पूरी होने के बाद उनका नाम अम्बरपुर में स्थित एक विद्यालय (रामदुलार इंटर कॉलेज) में दाखिला करवा दिया गया , जहां से इनको 6 से 8 तक की शिक्षा प्राप्त हुई यहीं से इनको उर्दू की तालीम दर्जा 7 से मिली ।
और बाद में आगे दसवीं की शिक्षा एक मदरसा स्कूल (मसूद अख्तर इंटर कॉलेज नगपुर जलालपुर) से मिली और 11वीं से लेकर
बी0ए0 तक की तालीम यह अपने नानी के घर रुक कर करीब के एक महाविद्यालय (झाम बाबा पी0जी0 कॉलेज ) से प्राप्त किया ।
जिसमे इनके परम पूजनीय नाना श्री गुरु प्रसाद जी खुद एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं । जिनके माध्यम से कपूर को शिक्षा मिलती रही और फिर इनकी
B.Ed की पढ़ाई श्री शंकर जी पी0जी0 कॉलेज मठिया से हुई।
साहित्यिक जीवन :-
यह कुछ कहने से पहले सर्वप्रथम उर्दू अदब के मशहूर शायर (जौन एलिया) के कदमों में अपने संपूर्ण कलाम को रख देते हैं।
कपूर की पहली वार्षिक पत्रिका (दास्तान ए हिज्र) 28 दिसंबर 2018 को प्रकाशित हुई ।और उनकी किताब (कलाम ए परी ) 3 मार्च 2021 को प्रकाशित हुई।
कृष्ण कपूर द्वारा रचित हिंदी की लगभग 200 से ज्यादा कविता और उर्दू की 67 गजलें और 27 कहानियां हैं। जिसमें उर्दू के चार मुक्तसर अफसाने , तीन नावेल और 20 कहानियां हैं इन्होंने अंग्रेजी में 3 सॉनेट sonnet भी लिखा है । और अपने मुक्तसर अफसाना
को ही पंजाबी में तर्जुमा (अनुवाद) किया है। कपूर की हर एक रचना बेहद दिलचस्पी है इनकी गजलें हर एक शख्स के दिल के साथ-साथ उसके सोच पर भी असर डालती हैं। उनकी कविता हर एक को हकीकत से रूबरू करवाती है।
कपूर को अकेला रहना और ना बोलना बेहद पसंद था यह मिलनसार ना होकर खुद को हर वक्त शांत रखने का प्रयास करते थे । अंधेरा इनको इस कदर पसंद है कि इनकी हर एक ग़ज़ल में अंधेरे पन का जिक्र मिलता रहता है। आम शब्द में कह सकते हैं कि यह जॉन एलिया के जैसे ही रहने का प्रयास करते हैं।
उनकी किताब कलाम ए परी लोगों को ऑनलाइन Kalam e pari flipkartफ्लिपकार्ट , Kalam e pari Amazonअमेजन और Kalam e pari playstoreप्ले स्टोर पर मिलती रही , जिसको सर्वप्रथम कपूर के प्रिय सहपाठी सतीश गुप्ता और शिवांशु श्रीवास्तव जी ने मंगाया । फिर बाद में लोगों तक अपनी पुस्तक को ऑफलाइन पहुंचने का प्रयास किया ।
मशहूर गजल के शेर :-
अब कोई सुनता नहीं मेरे फिराक की सदाएं
अब तो अदावत करने भी हमसफ़र नहीं आता
कितना बे नियाज़ी है मेरा चारासाज कपूर
वो दैर व हरम में भटकता है मेरे घर नहीं आता
फिराक - दुःख, अदावत - दुश्मनी, शदा - आवाज़
बे नियाज़ी - बेपरवाह, दैर- मंदिर , हरम- मस्जिद
गुफ्तगू संभल के करना वरना फैला भी सकता है
जिसको हम अपने घर की दीवार समझते हैं
शहर ए ख़ामोसा हो गया एक दिन मेरा दिल
फिर भी हम उसको अपना दयार समझते हैं
गुफ्तगू- बातचीत, शहरे खामोसा- कब्रिस्तान,दयार - घर
मुझको चलने दो अकेला है अभी सफ़र मेरा
काफिला हो जाऊंगा गर सोचा गिराने को
पास था उसके तो कभी पहचाना नहीं कपूर
अब तो दूर जा रहे हैं ये हाथ हिलाता क्यों है
जिंदगी भी चाहती है कि मैं खुदकुशी करूं कपूर
तो हो जाए कोई हादसात अब वो आता ही नहीं
इश्क हो,लगाव हो, या हो किसी से हिज्र
पर तुम बनना न देवदास हां ये अच्छी बात है
मुझे मालूम हुआ कल कि ये बादल मोहब्बत करता है
जब तेरे धूप में निकलते ही समियाना बन गया
मैं देखना नहीं चाहता फिर भी देखने लगता हूं
वो मंजर ही कुछ इस कदर कमाल आता है
लोग राज पूछते हैं मेरे बदल जाने का
टूट के बिखर के संभल जाने का
वो आई है अरसे बाद मुझसे मोहब्बत करने
कोई रास्ता दिखाए उसको निकल जाने का
अदाकारी मक्कारी और गद्दारी से यहां
कैसे फना हुए सभी इंसान को देखो
रचना :-
Sonnet:-
1. ' O grotesque thou face haunt'
2. 'O my beauty indulgent'
3. 'O my last beauty spouse'
हिंदी की महत्वपूर्ण रचना -
• चरित्र का महत्त्व ( निबंध) (2014)
• कर भला तो हो भला (कहानी)(2015)
• कर बुरा तो हो बुरा(मुक्तसर अफसाना)(2015)
• दुष्ट की संगति का फल(कहानी)(2014)
• ईश्वर सत्य है (कहानी)(2015)
• विधवा व अनाथ की जिंदगी (मुक्तसर अफसाना)(2013)
• अपने हुए पराए (कहानी) (2017)
परियों का रुखसत (उपन्यास) ( 28/12/ 2018)
प्रणय की यथार्थता(2021),मीठी सी आवाज परी की(2018) ,ये पढ़ाई भी क्या बवाल है(2009),अन्नदाता की शान (2021),कोरोना का कहर (2020),मां की खुशबू(2010),मानव में मानवता(2016),हिन्दुस्तान हमारा है,सरताज ए लड़की(2011),सब जन की सम्मान है लड़की,जहान का श्रृंगार,रोटी के वास्ते,तुम चलो(2021),तुम चलो तो सही(2021),परी की याद(2020),बचपन में स्कूल 🏫 की याद(2017),पढ़लो अभी है मौके यार(2017),डायरिया के शिकार(2014),
आधुनिक नेता एवं आधुनिक ओटर(2017),ओट गिनने के बाद का मंजर(2017), परी से दोस्ती (2018),ऋतुओं की डोर,पानी का गुलदस्ता,चरित्र का महत्व 1,चरित्र का महत्व 2,नाना के प्रति,जमाने बदलते हैं,विधवा व अनाथ की जिंदगी(2013)
गूगल साइट:-
कृष्ण कपूर की कुछ सोशल मीडिया से संबंधित लिंक
Krishn kapoor kmg