👇👇👇👇👇👇👇

सब ऐ महताब में पढ़ लेता था रुखसार की आँखे
अब तो मेरी हालत बताने भी कोई अहल ऐ नजर नहीं आता

कितना बे नियाजी है मेरा चारासाज कपूर
वो दैर व हरम में भटकता है मेरे घर नहीं आता

अब कोई सुनता नहीं मेरे फिराक की शदाये
अब तो अदावत करने भी हमसफ़र नहीं आता

इश्क़ इस कदर किया जाये
कि इश्क़ का जिक्र ही न किया जाये

इतना टूट जाएंगे कतरा कतरा बिखर के
की अपनी हिज़्र के आढ़त पे गम उधार देंगे हम

बात तेरी तस्वीर की क्या है जाना
तुझको भी जहन से उतार देंगे हम

तेरे दिए हुए जख्म आज भी हरे - भरे हैं
ये तेरी आखरी निशानी है तो दवा करें क्यूँ

ढूंढ के मार क्यूँ न दें उन सारे रक़ीबो को
फ़क़्त दुनिया में पागलों सा टहला करें क्यूँ

ये आँखे भी ले जाते साथ अपने
अब तुम्हारे तस्वीर को देखा करें क्यूँ

मर्द में से गैरत और औरत में से इज़्ज़त निकाल दीजिये
तो दोनों को फूँक मार के उड़ा दीजिये

पच्चीसों मेल का खेल मुझको याद था उस वक़्त
अक्कड-बक्कड़ बम्बे-बो तो मेरी जबानी थी
न जाते थे कभी पढ़ने मार खाने के डर से
गिल्ली-गोली बाग़ में खेलो अपनी मेज़बानी थी

बहुत डरता था कि कहीं वो छोड़ न दे मुझे
देख ये भी हो गया हादशात एक दिन

पास था उसके तो कभी पहचाना नहीं "कपूर"
अब तो दूर जा रहे हैं ये हाथ हिलाता क्यूँ है

जिक्र हर रोज होता था उसके शहर में मेरा
इस कदर बन गया मैं वाक़यात एक दिन

मना करने पर भी करली मुलाक़ात एक दिन
हमने तोफे में बेच दी औक़ात एक दिन

थोड़ी सी जगह देदे अपने दिल में मुझे भी
फना हो गए हम करते गुजारीशात एक दिन

ये गम ये दर्द ये हिज्र जीते जी मार देगा मुझे
गौर पे करोगे तुम आंशू की बरसात एक दिन
गौर - कब्र
हिज्र - जुदाई , बिछडन

खर्च कर दिया खुद को मैंने एक उन्हें मनाने में
वो रूठ जातें हैं बार बार नियत शराब की है

मुकम्मल हो गए होते तूम्हारे इश्क़ में "कपूर"
बस उस वक्त मेरी जुबाँ में वो बात न रहा

कोई तलब बाक़ी नहीं है
कितना अमीर हो गया हूँ मैं

एक दिन हार के,थक के कर ली ख़ुदकुशी "कपूर" ने
वो फिर भी रक़ीबो में मुफ्तला दिखता है

वो हमसे रूठ जाने का बहाना ढूंढ रहा है
रहेगा साथ नहीं मेरे ठिकाना ढूंढ रहा है

मोहब्बत के वशूलों को एक दिन तोड़ जाएंगे
मोहब्बत में हुए बर्बाद मोहबत छोड़ जाएंगे

तेरे बगैर सब अँधेरा था अँधेरा ही रहा
ये जुगनूं ,चाँद सब फीके हैं आफताब तो दे

क्या कहा - काबीलियत नही मुझमे तुझे समझने का
चंद लम्हों में समझ जाऊँ मुझे शराब तो दे

नींद,चैन,लगाव सब कुछ खो गया एक उसके बिछड़ने पर
कभी सोंचा ही नहीं था की ऐसी हालात हो जाएगी

इश्क़ हो,लगाव हो या हो किसी से हिज़्र
मगर तुम बनना न देवदास हां ये अच्छी बात है

कुछ हाशिनाएं जो मेरा दिल जीत ली हैं
उन पर भी मेरी तबाही गुलाब से होगी

आज भी उसके दीदार से फना है लाखों बीमारी
मुझे रूह-रूह में उसके तो दवा दिखता है
Tags:
Krishn kapoor kmg