Krishn Kapoor Kmg
Krishn kapoor kmg
***प्रणय की यथार्थता***
1.ये प्रणय सत्कार में है।
सोम के बौछार में है।
हो रहा क्यों प्रणय अवरोहण?
क्या कमी व्यवहार में है?
2.क्या मिथ्या क्या यथार्थ है?
क्यूं विकल तेरा गार्थ है?
तूं ही बता क्या रीत है?
इस जगत में जो प्रीत।
लिप्सा तेरी क्यूं रुक गई?
क्यूं सुप्त तूं संसार में है?
ये प्रणय सत्कार में है।
सोम के बौछार में है।
3.तुम सत्य में विचरण करो।
मृदुल सुमन रोहण करो।
इस अधर में प्रणय वही हो।
घट हो पुलकित तुम कहीं हो।
उल्लास की उद्यम छिपी
इस मानवीय अवतार में हैं।
ये प्रणय सत्कार में है।
सोम के बौछार में है।
(कृष्ण कपूर kmg)
( शब्दकोश)
1.प्रणय- प्रेम, या प्रेमयुक्त प्रार्थना 2.सोम- अमृत, विशिष्ट, चंद्रमा 3.विकल- व्याकुल 5. गार्थ- फुलवारी,बाग,आंगन 5.मिथ्या- झूठ 6. लिप्सा- इच्छा
7.सुप्त- सोया हुआ,8.रोहण- बीज आदि का अंकुरित होना , ऊपर की ओर चढ़ना,9. उल्लास- उमंग, सुख प्राप्ति की अल्पकालिक किया 10. उद्यम- परिश्रम।
कवि के बारे में जानने के लिए यहां क्लिक कीजिए
👇👇👇👇👇👇👇👇
