Krishn kapoor kmg ji ki kavita





8. सरताज ए लड़की (2012)

(ये कविता निर्भया कांड के पीड़िता के लिए लिखा गया है ।)



1.जमी आसमा पे है परवाज़ लड़की।
सारे जहां की है सरताज लड़की।
जुल्मों सितम को दिखती हैं ये,
अपनी व्यथा को बताती हैं ये।
पापी बना है क्यों सारा जमाना,
जुनूं का बड़ा बन गया है दिवाना।
सारे राजो की है राज लड़की।
सारे जहां की है सरताज लड़की।

2.मेरी भी कुछ शौक है होने दो उसको पूरा,
गर ना होगा पूरा तो तूं रह जाएगा अधूरा।
तू रह जाएगा अधूरा तो सारे दुखों को ढोएगा,
मिलेंगे सपनों में भी दुख अपनी किस्मत पे रोएगा।
फूलों की तरह से है अंदाज़ लड़की।
सारे जहां की है सरताज लड़की।

3.दुनिया बड़ी जालिम है हर पल मुझे सताती है,
क्या जीने का अधिकार नहीं ज़ुल्मों सितम को ढाती है।
है बहुत से मिसाल ऐसे क्या क्या तुम्हे बताऊं,
मुझ पर भी गुजरा ऐसा कैसे तुम्हे दिखाऊ।
आप के बदौलत ही है साज लड़की,
सारे जहां की है सरताज लड़की ।

4.क्या हाल हुआ था दामिनी का देखा भी नहीं जाता था,
लोगो ने कैसा हश्र किया सोचा भी नहीं जाता था।
कहना उसका था कि मैं भी चाहती हूं शौक़ से जीना,
पर मेरी इज्ज़त इसी समाज ने बेरहमी से छीना।
फिर भी फैले हैं परवाज़ लड़की।
सारे जहां की है सरताज लड़की।

5.ना मार मुझे ऐ दुनिया मुझसे ही बना संसार है,
वीराना हो जाएगा सब जो दुनिया में श्रृंगार है।
क्या पाता है ऐसा करके न जाने मजा क्या होता है,
हो जाती बर्बाद जिंदगी जन्मो जन्म तूं रोता है।
ना मिटा साज है नाज़ लड़की।
सारे जहां की है सरताज लड़की।





9. सब जन की सम्मान है लड़की


1.सारे जहां की शान है लड़की।
सब जन की सम्मान है लड़की।
लड़की स्वर्ग को लाती है,
घर को स्वर्ग बनाती है।
इनपे ही संसार टिका,
सम्पूर्ण जगत का प्यार टिका।
सभी शानो की शान है लड़की।
सब जन की सम्मान है लड़की।

2.जीवन बगिया महाकाती हैं ये,
प्रेम का फूल खिलाती हैं ये।
सभी दुखों को सहती हैं ये,
कभी किसी से न कहती हैं ये।
सभी सुखों की खान है लड़की।
सब जन की सम्मान है लड़की।

3.इनसे ही बने हैं सारे समाज,
बन गए सारे रस्म रिवाज।
इस जहां की महत्वपूर्ण अंग है लड़की,
सामाजिक जागरूकता का रंग है लड़की।
सभी बयानों की बयान है लड़की।
सब जन की सम्मान है लड़की।








        
           10. जहान का श्रृंगार 

अगर ना होते पारब्रह्म, तो सुख का सागर पाता कौन?
होते अगर न संत व साधू, भक्ति भजन कर पाता कौन?
अगर न होती कोयल जग, में वाणी मधुर बनता कौन?
मधुमक्खी जो यहां ना होते, मेलजोल कर पाता कौन?
अगर ना होती धरा पर चींटी, मेहनत कर के खाता कौन?
होती अगर ना जल की धारा, आगे मुख बढ़ पाता कौन?
अगर ना होते जग में दीपक, हमको राह दिखाता कौन?
फूल गुलाब के अगर ना होते, कांटो में मुस्काता कौन?
अगर ना बोले प्रतिदिन मुर्गे, ठीक सुबह जगाता कौन?
सूरज की किरणे ना होती, जग रोशन कर पाता कौन?
अगर ना होते तोता मैना, प्रेम यहां कर पाता कौन?
होते अगर ना राम कृष्ण, तो दयावान बन पाता कौन?








          11. रोटी के वास्ते 

1.दुनिया में जितने धर्म हैं, दुनिया में जितने कर्म है।
कपड़े किसी के लाल है, लंबे किसी के बाल है।
सब कश्प वा कमाल है, बांधे कोई रुमाल है।
रोटी के वास्ते
2.बदले किसी के रूप हैं, अंधेरो में भी धूप है।
आतताई का अत्याचार है, प्रेमियों का प्यार है।
दुनिया में जितने आन है, जाती किसी की जान है।
रोटी के वास्ते
3.जितने बने हैं रीति, करते हैं सभी प्रीति।
बदली किसी की इच्छा, मांगे कोई भिक्षा।
ईश्वर में लगी लगन, होता है ये भजन।
रोटी के वास्ते
4.बच्चो की ये जो खेला है, लगती यहां जो मेला है।
जाती किसी की जान, तो मिलती किसी को मान।
जितने बने हैं धाम, करते हैं सभी काम।
रोटी के वास्ते
5.देश में सब अनजाने है, अपने भी बेगाने हैं।
इस दुनिया की रीति है, जग में हार जीत है।
धरती पे जितने रंग है, रहते सभी संग हैं।
रोटी के वास्ते








 12.तुम चलो

1.रास्ते आसान होंगे तुम चलो।
ग़ैर भी मेहमान होंगे तुम चलो।
इस धरा के योद्धा तुम बन जाओगे,
जग में नाम ही नाम होंगे तुम चलो।
मुठ्ठी में कुछ सपने अपने बांध लो।
दुनिया की सारी रस्मो को साध लो।
पर्वत के भी पांव उखड़ जाएंगे,
पूर्ण सारे काम होंगे तुम चलो।

2.अश्रु के ये बूंद ना दिखलाओ तुम।
अपने अंदर एक हुंकार लगाओ तुम।
ये जन क्या जग भी बदल जाएंगे,
एक दिन इंसान होंगे तुम चलो।

      






  13.तुम चलो तो सही

दिन बदल जाएंगे तुम चलो तो सही।
दुःख भी ढल जाएंगे तुम चलो तो सही।
रास्ते में मिलेंगे हजारों शिखर,
वो भी झुक जाएंगे तुम चलो तो सही।
हार मानो ना यां की किसी बात से,
लड़ते रहना है तुमको हर इक रात से।
टूट कर के बिखर के संभल जाएंगे,
और होंगे सफल तुम चलो तो सही।







14. परी की याद  

 1. तेरी गलियों से जब गुजरूं, बिछड़ना याद आता है।
तेरा महताब सा चेहरा, निखरना याद आता है।
मैं तुझको ढूंढ़ता फिरता हूं, पागल सा जमाने में,
तेरा कलियो के शबनम सा, सिहराना याद आता है।

2.कभी पेड़ों की छाओ में, महज़ बातें जो होती थीं।
कभी बातों ही बातो में, कई रातें जो होती थीं।
तूं मुझको भूल जाएं तो, कोई भी गम नहीं लेकिन,
तेरा भी मेरी गलियों में, निखरना याद आता है।

3.तेरी दिल की गलियों में, हम घर जो बना लेते।
दोनों करते मिल के परवाज़, हम पर जो बना लेते।
खुदा ने साथ ना दी है, ये कहते हैं जमाने से,
कि सारे साज-सपनो का, बिखरना याद आता है।


KRISHN KAPOOR KMG

I am a writer. My First Book (Kalam A Pari) And second book (Pranay ki yatharthta). Village-Savargah, District-Ambedkar Nagar (Uttar Pradesh).

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