Krishn kapoor kmg ki kavita

1.मीठी सी आवाज परी की

1.एक परी थी सबसे प्यारी , सपनो में वो आती थी।
मीठी सी आवाज थी उसकी , मुझसे खूब बतलाती थी।
एक बार मैं बोला उससे , एक जरा सा काम करो।
इतनी प्यारी सी हो तुम , थोडा सा आराम करो ।
मैं मदहोश हुआ बातो में , झूम गया फिर मस्ती में ।
  उसकी तीन और सहेली ,आने लगी मेरी बस्ती में ।
सपनो मे ही वो सब परियां , मुझको दोस्त बनाती थी ।
 मीठी सी आवाज थी उसकी , मुझसे खूब बतलाती थी।

2.मैं खुशियों में झूम-झूम के , बात उन्ही से करता था ।
कोई कुछ कहता मुझको पर , साथ उन्हीं के रहता था । 
आता तब तक एक जुगनू , मौज भरी मस्तानी से।
सारी परियां दौड़ पड़ी तब , अपनी कारस्तानी से ।
मैं फौरन गया परी के साथ , उसको पकड़ के लाता हूँ।  
सारी परियों से फिर मैं , उससे मेल कराता हूँ ।
झूम- झूम के सारी परिया , खुशियों से भर जाती थी । 
मीठी सी आवाज थी उसकी , मुझसे खूब बतलाती थी।

3.उसी रात बाकी परिया सब , अपने घर को जाती है।
पर एक परी जो सबसे प्यारी , मेरे पास रह जाती है ।
 दोनो मिल के साथ-साथ , एक अलग देश में जाते है।
 वहां पे परियों का मेला , सब झूला झूलने आते है ।
एक अचानक परियों का , झूला फौरन टूट गया।
मेरे सारे साज व सपनो का इतराना छूट गया ।
नींद खुली जब मेरी , परियो की याद ही आती थी। 
मीठी सी आवाज थी उसकी , मुझसे खूब बतलाती थी।

   

     2. ये पढ़ाई भी क्या बवाल है


1.उफ़-उफ़ ये पढ़ाई भी क्या बवाल है।
इसमें बड़े-बड़े सवाल हैं।
पढ़ाई को देखकर चक्कर आ जाता है,
उल्टा-पुल्टा दिमाग घूम जाता है।
दिल करता है धक-धक, धक-धक,
मम्मी कहती चल पढ़, चल पढ़।
पढ़ाई का भी कैसा जाल है।
इसमें बड़े-बड़े सवाल हैं।

2.छुट्टी कहती मत कर तू पढ़ाई,
आज मेरे साथ खेल ले भाई।
पढ़ाई से सिर दर्द होता है,
बच्चों के लिए बेदर्द होता है।
पढ़ाई के साथ बहुत कमाल है।
इसमें बड़े-बड़े सवाल है।

3.काश ना होती ये पढ़ाई तो मजा होता,
बड़े-बड़े जुर्म होते तो सजा होता।
इसलिए हमें कर लेनी है पढ़ाई,
किसी से भी नहीं करनी है लड़ाई।
और पढ़ना है अब बड़े- बड़े सवाल,
तोड़ देना है मुश्किलों का जाल।
पढ़ाई से ये सबका हाल है।
इसमें बड़े बड़े सवाल है।

4.कभी ऐसे समय आ जाएंगे,
हम आगे नहीं बढ़ पाएंगे।
क्योंकि शासन पे शासन है,
इतना यहां प्रशासन है।
पढ़ाई से ही अब हो रहे धमाल है,
इसमें बड़े-बड़े सवाल है।
उफ़-उफ़ ये पढ़ाई भी क्या बवाल है।
इसमें बड़े बड़े सवाल है।



      3.अन्नदाता की शान (2021)

इस कविता को 26 जनवरी 2021 को "कृष्ण कपूर kmg" के माध्यम से लिखा गया है । जिसमें किसानों की व्यथा का गुणगान किया गया है।



    1.देश के अन्नदाता की, शान तुम्हें दिखाऊं।
अब कैसे जी रहे हैं, वो किसान तुम्हें दिखाऊं।
उनकी हालत देख के यारों,रोना भी आ जाता है।
सिर में इतनी चुभन होती, कि सोना भी आ जाता है।
हरियाणा पंजाब क्या, पूरे देश की ऐसी हालत है।
मुझे तो ऐसे सत्ता और सरकार पर ही लानत है।
कभी वो सूखा बाढ़ सहे,सहे कभी तूफ़ानों को।
गोलियों से फिर क्यों, मारा जा रहा किसानों को?
खेतों में जो सो गए हैं बलिदान तुम्हें दिखाऊं।
अब कैसे जी रहे हैं वो किसान तुम्हें दिखाऊं।

2.मांग रहे थे अपना हक,इसमें क्या गलती कर दी।
हमदर्दी समझे जिससे वो, बन बैठे क्यों बेदर्दी।
कहीं पे आंसू गैसो से, देखो उनपे वार कर किए।
इतनी ठंडक में भी,पानी से बौछार किए।
देखो अब उनके ही लिए, अपराध कितने बढ़ गए।
बहुत से ऐसे किसान हैं,जो फांसी पे चढ़ गए।
बिखर गए जौ,गेहूं,मक्का,धान तुम्हे दिखाऊं।
अब कैसे जी रहे है,वो किसान तुम्हें दिखाऊं।

3.जो औरों की भूख मिटाता,वो खाली पेट क्यों सोता है?
सड़को पे धरना करके, दर-दर फिरता क्यों रोता है?
जो अपनी कंधे पे देखो, खुद हल ले के चलता है।
आज उसी की कठिनाई का, हल क्यों नहीं निकलता है?
मिट्टी का कण-कण रोया है, रोयी है पूरी धरती।
रोया है संसार देख, जब निकली है उसकी अर्थी।
हैरान हो गया लाशों से,शमशान तुम्हें दिखाऊं।
अब कैसे जी रहे है, वो किसान तुम्हें दिखाऊं।
देश के अन्नदाता की, शान तुम्हें दिखाऊं।
अब कैसे जी रहे है, वो किसान तुम्हें दिखाऊं।


   



                4. कोरोना का कहर 2020 

1.सब सबसे बचो महामारी आयी है।
जनाब कोरोना की बीमारी आयी है।
ये कैसा कहर बन के आया कोरोना,
एक नियम लगा बार-बार हाथ धोना।
कोई डर के मारे कहीं सो रहा है,
कोई दर बदर हो के रो रहा है।
मुंह पे बंधा है सभी के नक़ाब,
कोरोना के डर से है हालत खराब।
बाजारों में घर-घर लगे सबके ताले,
सभी सबसे अलग हो गए दुनिया वाले।
सबको निगल जाने की सवारी आयी है।
जनाब कोरोना की बीमारी आयी है।

2.गली और कूचे सब पड़ गए सन्नाटे,
किसी के घरों में खत्म हुए आंटे।
कोई भूख से पेट पकड़े हुए है,
अपने दोनों हाथों को जकड़े हुए है।
पागलों सा कोई घर को जाने लगा है,
ना मिले कोई साधन फिर भी जाने लगा है।
कोई मानता ही ना कितना मनाऊं,
कोरोना के एक-एक कहर को सुनाऊं।
कोई कह रहा ये है साजिश ए अफवाह,
कोई हंस रहा मुझपे कहता है वाह !
अरे बचाओ सबको सब जिम्मेदारी आयी है।
जनाब कोरोना की बीमारी आयी है।

3.धीरे धीरे घटने लगे सभी लोग,
सब घबरा के बोले ये सच्चा है रोग।
न कोई दवा है ना कोई इलाज,
इसी ही बीमारी का फैला आगाज़।
कोई जो आता है घर पे शहर से,
पहले जांच करते हैं कोरोना के डर से।
जिसमे भी मिला है ये वायरस कोरोना,
मानो उस के जिंदगी में लिखा है रोना।
कोई मां बिछड़ती है बच्चों से दूर,
कोई बाप बोले खत्म मेरा नूर।
खत्म सबके रोजगार बेरोजगारी आयी है।
जनाब कोरोना की बीमारी आयी है।
सब सबसे बचो महामारी आयी है।
जनाब कोरोना की बीमारी आयी है।




     5.माँ की खुशबू 

1.माँ तो सबकी मां है, दिलो और जान में। माँ की खुशबू तो, महकती है जहान में।
माँ ही सबको चलना सिखाती है,
माँ ही सबको अच्छा पाठ पढ़ाती है।
माँ के कदमों में दुनिया की सारी भक्ति है,
माँ के आंचल में सबसे बड़ी शक्ति है।
माँ तो कण-कण में है और है मकान में।
माँ की खुशबू तो महकती है जहान में ।

2.माँ बच्चों को सूखे पर सुलाती है,
जब सोते नहीं तो लोरियां सुनाती है।
माँ का इज्जत तो चांद तारे भी करते हैं,
माँ को कुछ हो जाए तो सभी लोग मरते हैं।
माँ का नाम ले कर चलते हैं सब उड़ान में।
माँ की खुशबू तो महकती है जहान में।

3.माँ से बढ़कर दुनिया में ना जन्नत है कोई,
माँ से बढ़कर दुनिया में ना मन्नत है कोई।
माँ वही है जो सारे सुख दुःख को सहती है,
जन्नत मन्नत तो मां के कदमों में रहती है।
माँ का नाम तो है हर इक जुबान में।
माँ की खुशबू तो महकती है जहान में।

4.माँ अपने बच्चो को प्यार किया करती है,
बच्चा कहीं जाए तो इंतजार किया करती है।
पर बच्चे मां को दिल से नहीं लगाते हैं,
एक नारी के प्रेम में मां को भूल जाते हैं।
वो नारी भी मां होती है एक दिन इस मकान में,
माँ की खुशबू तो महकती है जहान में।
माँ तो सबकी मां है, दिलो और जान में।
माँ की खुशबू तो, महकती है जहान में।




6. मानव में मानवता

1.सबको खूब मानते जाओ, प्रेम के रंग लगाते जाओ।
        कोई किसी से रूठे ना,
           साथ किसी का छूटेना।
                         मानव को मानव से जोड़ों, 
                        पुल प्रेम का कभी ना तोड़ो।
                        रिश्ते अनमोल मोती हैं , 
                        यूं ना इसे गंवाते जाओ।
सबको खूब मानते जाओ, प्रेम के रंग लगाते जाओ।

              2. सारा जग परिवार है अपना,
                   हर कोई रिश्तेदार है अपना।
   प्यार का धन जो पाता है,
      किस्मत वाला बन जाता है
        जिससे सुंदर जहां बन सके ,
       वो सम्मान जुटाते जाओ।
    सबको खूब मानते जाओ,प्रेम के रंग लगाते जाओ।

              3.मतलब भर ना रहो यहां पे,
               सारे दुःख को सहो यहां पे।
              तब जाके सुख आएगा, 
              अंधेरा सब मिट जाएगा।
            अपनी ज्ञान की ज्योति से,
           दुनिया में उजाला करते जाओ
सबको खूब मानते जाओ,प्रेम के रंग लगाते जाओ।

4.मार काट करते हो क्यूं तुम?
 बेवजह मरते हो क्यूं तुम?
       सबको दिल से लगा ले भाई, 
    कर प्रेम तूं कर ना लड़ाई।
                   हर दिल दिल से मिल जाएगा,
                    दिल को बड़ा बनाते जाओ।
सबको खूब मानते जाओ, प्रेम के रंग लगाते जाओ।

5.जात-पात का भेद मिटाओ,
 एक दूजे को गले लगाओ।
प्यार से मानवता मिलता है,
 सुख में आके दिल खिलता है।
                    मानवता की खुशबू से,
 घर-घर, दर-दर महकाते जाओ।
सबको खूब मानते जाओ ,प्रेम के रंग लगाते जाओ।

6.प्रीति प्यार सिखलाना तुम,
 जीवन बगिया महकाना तुम।
मनको शुद्ध बनाना तुम,
सच की राह दिखाना तुम।
अपनों को तो सब अपनाते,
 गैरों को अपनाते जाओ।
सबको खूब मानते जाओ, प्रेम के रंग लगाते जाओ।

7.मै मेरी के नशे को छोड़ो,
ईर्ष्या वैर की भठ्ठी तोड़ो।
हर दिल मंदिर भगवान का,
 पूजा करो इंसान का।
जीवन स्तर उठ जाएगा,
 गुरु को शीश झुकाते जाओ।
सबको खूब मानते जाओ,प्रेम के रंग लगाते जाओ

8.मानवता अपनाओ सब जन,
 मानव बन दिखलाओ....सब जन।
अंधेरा को निकालो सब जन,
 जग रोशन कर डालो... सब जन।
मानवता को बांट-बांट के,
मानव सभी बनाते जाओ।
सबको खूब मानते जाओ, प्रेम के रंग लगाते जाओ।





   
   7.हिन्दुस्तान हमारा है 

1.हिन्दुस्तान हमारा है ,हिन्दी का ही नारा है।
हिन्दुस्तान में जन्म हुआ,तो हिंदी को अपनाना है।
कथा कहानी कविता लिख के,जन जन तक पहुंचाना है।
सूर कबीर तुलसी ने मिलकर, सबने इसे सवारा है।
हिन्दुस्तान हमारा है ,हिन्दी का ही नारा है।

2.बहुत बड़ा है इस दुनिया में,हिंदी का संसार,
शब्द शब्द अच्छर अच्छर में,खूब भरा है प्यार।
बिदिस दिसि हिंदुस्तान में,हिंदी का नजारा है।
हिन्दुस्तान हमारा है ,हिन्दी का ही नारा है।

3.बहुत से भाषा इसी सहारे,जहां में बोले जाते है,
हिंदी को अपना के सब,नया सवेरा लाते हैं।
हिंदी पर ही बहुत से लेखक ,सारा जीवन गुजरा है।
हिन्दुस्तान हमारा है हिन्दी का ही नारा है।

4.बहुत से प्रेमी हिंदी में,लिख गए प्रेम के गीत,
हिन्दुस्तान में जिसको पढ़ के,करते हैं सब प्रीत।
जितना कविता लिखा है हमने,हिंदी ने दिया इशारा है।
हिन्दुस्तान हमारा है ,हिन्दी का ही नारा है।

5.जिसने हिंदी को बतलाया,वो महान इंसान है,
बहुत सी कविता लिखी है सबने,भारत का सम्मान है।
कोई बोले राधेश्याम,बोले कोई सीताराम हिंदी सबसे प्यारा है ।   
हिन्दुस्तान हमारा है,
हिन्दी का ही नारा है।


Krishn Kapoor kmg
KRISHN KAPOOR KMG

I am a writer. My First Book (Kalam A Pari) And second book (Pranay ki yatharthta). Village-Savargah, District-Ambedkar Nagar (Uttar Pradesh).

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