15.बचपन में स्कूल 🏫 की याद(2016)
1. वो स्कूल के कुछ यारों का प्यार याद आता है।
हां वो मैडम जी की डांटें सर का मार याद आता है।
कभी कभी वो पहली घंटी में जो लेट जाते थे,
फीस न देने पर घर को लौट आते थे।
दोस्त मेरे बैग से टेबल साफ करते थे,
कुछ थोड़ा झगड़ते फिर उनको माफ करते थे।
बैठ पुलिया पे दोस्तों का इंतजार याद आता है,
हां वो मैडम जी की डांटें सर का मार याद आता है।
2.ख़ाली घंटी में चोर सिपाही खेल लेते थे,
नाजुक थे पर बैग का बोझ झेल लेते थे।
चुरा लेते थे बैग में चाक डेस्तर को हम,
मना लेते थे जानने पर मॉनिटर को हम।
बहाने में दादी, नानी का बीमार याद आता है,
हां वो मैडम जी की डांटें सर का मार याद आता है।
3.खेल खेल में कभी कभी धड़ाम से गिर जाते थे,
देख फिर मैडम को जोर से चिल्लाते थे।
फिर वो हमको कुछ इस कदर बहलाते थे,
बगल के मोटू चाचा के दुकान पे ले जाते थे।
मैडम जी का इस कदर दुलार याद आता है।
हां वो मैडम जी की डांटें सर का मार याद आता है।
16. पढ़ लो अभी है मौके यार
1.प्यार - वार सब है बेकार।
पढ़ लो अभी है मौके यार।
ना तू कभी पढ़ पाएगा,
जीवन से धोखा खाएगा।
प्यार में नक्शा बिगड़ जाएगा,
जान ले बाबू उजड़ जाएगा।
जो - जो मेरे सामने अकड़ने लगे,
प्यार के मार्ग को पकड़ने लगे।
ना वो पढ़ पाए इस जहां में कभी,
उनको धिक्कारने लगे हैं सभी।
ना कर तू अभी आंखें चार।
पढ़ लो अभी हैं मौके यार ।
2.इंद्रियां शिथिल हो जाएंगी,
जब गलत भावना आएंगी।
मानवता दानवता में बदल जाएगा,
तेरा अच्छा समय तब निकल जाएगा।
फैशन का सुचालक हो जाएगा,
शिक्षा का कुचालक हो जाएगा।
बीत जाएंगे समय कुछ ना कर पाओगे,
इक दिन इस जमीं पर सो जाओगे।
पढ़ने के लिए हो जाओ तैयार ।
पढ़ लो अभी हैं मौके यार ।
प्यार बार सब है बेकार ।
पढ़ लो अभी हम मौके यार।
17.डायरिया के शिकार(2014)
***वैज्ञानिक सलाह***
दस्त आना , उल्टी होना ,डायरिया कहलाता है।
ये संक्रमण रोग है ,गंदगी से आता है।
वायरल बैक्टीरियल डायरिया का कारण है।
शुद्ध खाना, स्वच्छ पीना इसका निवारण है।
डायरिया में शरीर का पानी कम हो जाता है।
सुस्ती खूब आती है डिहाइड्रेशन कहलाता है।
जब पेट में ज्यादा एसिडिटी बन जाता है।
तो कभी-कभी इससे भी डायरिया हो जाता है।
वायरल डायरिया हरदम होता है बरसात में।
इससे हमें बचना चाहिए दिन और रात में।
***डायरिया का मानव पर कहर**
1.जब हुए हम डायरिया के शिकार।
छाई सुस्ती चढ़ा बुखार।
सब बच्चों को लेकर अस्पताल में भागे,
बच्चों के लिए निशदिन जागे।
कुछ बच्चे ठीक होते हैं तो कुछ शरीर छोड़ते हैं,
मानो ऐसा लगता है मां बाप से मुंह मोड़ते हैं।
फैल रही है यह दुखद समाचार।
छाई सुस्ती चढ़ा बुखार।
2.कितनों की गोद सूनी हो गई,
जिससे सबकी नींदे खो गई।
किसी की बेटी, किसी का बेटा है,
कोई मुरझा के जमीं पर लेटा है।
हुआ जब डायरिया का प्रहार।
छाई सुस्ती चढ़ा बुखार।
3.कोई खोलकर बाल रोने लगी है,
तारों के लिए जी खोने लगी है।
बिलख बिलख के कोई रो रहा है,
परेशान होकर कोई सो रहा है।
बंध गए डायरिया में सब यार।
छाई सुस्ती चढ़ा बुखार।
4.मां के कलेजे से आह निकल रहे हैं,
सबकी आंखों से आंसू फिसल रहे हैं।
जमी आसमा पर है मातम सा छाया,
यह कैसा कहर जो डगर में है आया।
मानो हो गए हैं सूने संसार।
छाई सुस्ती चढ़ा बुखार।
5.आओ सफाई अभियान चलाएं,
सबको डायरिया से बचाएं।
नाली, कूचा और पगडंडी,
सफाई का लगाएं झंडी।
तभी जाकर होगा सुधार।
न छाएगी सुस्ती न होगा बुखार।
18.हम भी तेरे दीवाने हैं
1.छोड़ के हमको क्यों जाते हो, हम भी तेरे दीवाने हैं।
साथ में हम को ले के चलो तुम, हम भी अभी अनजाने हैं।
प्यार के पुल को तू ही बनाया,
उस पर चलना भी सिखाया।
सारे जहां को तू महकाया,
प्रेम का सबको पाठ पढ़ाया।
तू शम्मा जलती है हरदम, कितने जले परवाने हैं।
साथ में हम को ले के चलो तुम , हम भी तेरे दीवाने हैं।
2.जग के अंधेरे तुझसे मिटे हैं,
सारे जहां के दुख भी कटे हैं।
प्रेम के रंग का तू किरदार,
तेरे ही रंग में रंगा संसार।
वादा किया है जो तू हमसे,वो सब तुझे निभाने हैं।
साथ में हम को ले के चलो तुम, हम भी तेरे दीवाने हैं।
3.सुख का सागर तुझ में है,
प्रेम का गागर तुझ में है।
तुझसे ही संसार बना है,
संपूर्ण जगत का प्यार बना है।
प्रेम का रंग अभी बाकी है, वो अब तुझे लगाने हैं ।
छोड़ के हमको क्यों जाते हो हम भी तेरे दीवाने हैं।
4.खेलें कूदें हैं साथ में तेरे,
जिससे मिट गए हैं अंधेरे।
दुख का बोझ उठाना सिखाया,
दुनिया में चलना भी सिखाया।
जितना प्रेम किया है तुझसे अब उसको सजाने हैं।
छोड़ के हमको क्यों जाते हो, हम भी तेरे दीवाने हैं।
साथ में हम को ले के चलो तुम,हम भी अभी अनजाने हैं।
छोड़ के हमको क्यों जाते हो, हम भी तेरे दीवाने हैं।
19.हास्य व्यंग
****आधुनिक नेता एवं आधुनिक ओटर***
जब आ जाते हैं इलेक्शन गांव में,
बंद हो जाते हैं सिलेक्शन गांव में।
कोई क्षेत्र पंचायत में खड़ा है ,
कोई ग्राम पंचायत में खड़ा है ।
सब ने खूब दम लगा कर ,
अपने अपने चुनाव में लड़ा है।
सब अपनी अपनी बातों से प्रचार करते हैं,
उस समय जनता से नेता को प्यार करते हैं।
घर-घर जाकर सब पोस्टर लगाते हैं ,
एक-एक वोटर के दिल को बहलाते हैं ।
कोई प्रचार करने के लिए गाना बनाता है ,
उस गाने को गांव में जाकर चलाता है ।
जैसे-जैसे वोट पड़ने का दिन करीब आता है ,
वैसे-वैसे नेताओं के दिल घबराता है ।
खूब गाड़ियों के साथ नेता रैली निकालते हैं,
एक से बढ़कर एक टैली निकालते हैं ।
कोई नेता पीने वालों को दारु पिलातें है ,
अपने निशान के झंडे को खूब हिलातें है ।
जिस दिन वोट पड़ते हैं ,
उस दिन सब खूब लड़ते हैं ।
वोटर लिस्ट के वार्ड संख्या में, कोई नाम छांट रहा है ,
वोट देने वालों के लिए पर्ची कोई काट रहा है।
सब प्रत्याशी वोटरों को अपना निशान दिखाते हैं,
कहते हैं भैया याद रखना यही उन्हें बताते हैं।
कुछ लोग वोट देने दारू पीकर जाते हैं ,
बिना पर्ची खोलें मोहर मार के आते हैं।
जिसको जनता सबसे ज्यादा समर्थन देती है,
उसी के जीवन में सुनहरा परिवर्तन होती है।
20.हास्य व्यंग
***ओट गिनने के बाद***
जब केंद्रों पर वोट गिने जाते हैं ,
हजारों की भीड़ चले आते हैं।
मेले का भीड़ भी कम पड़ जाते हैं,
इतना वहां लोग बढ़ जाते हैं ।
कहीं पर हजारों मोटर कार खड़े हैं,
कहीं पर किसी के हजारों यार खड़े हैं।
शासन पर वहां शासन है ,
खूब वहां प्रशासन है ।
सभी गांव के प्रत्याशी को क्रम से बुलाते हैं साहब ,
स्वेच्छा पूर्वक वोट गणना कराते हैं साहब।
कोई जीतकर मुस्कुराता है वां पे ,
कोई हार के बिलबिलाता है वां पे।
मालों से किसी के गले भर गए हैं,
खुशियों से किसी के जी भर गए हैं।
हारे प्रत्याशी चुपके से चल गए हैं,
सूरज की तरह चुपके से ढल गए हैं।
कोई गम से जी अपना खोने लगा है ,
कोई चैन के नींद सोने लगा है ।
कहीं पर झगड़े मार हो रहे हैं ,
कहीं पर गोलियां फौदार हो रहे हैं।
और कोई बैठकर सोचता अपने घर में ,
कि कैसा जुल्म हो गया इस डगर में ।
कोई कह रहा हो गया इतना खर्चा ,
इसी बात की हर जगह फैली चर्चा।
ऐसे ऐसे लोग खड़े हुए थे ,
अपने अपने चरित्र पर लड़े हुए थे।
मैं हारूँ या जीतूं कोई गम नहीं है ,
मैं नौ वोट पाया कोई कम नहीं है।
देश आजाद से लड़ने वाले सीख नहीं पाए हैं,
कि इलेक्शन को वह कभी जीत नहीं पाए हैं ।
कोई किसी से दारू पैसे लिए हैं ,
भुलाकर उसे प्रचार दूसरों का किए हैं।
ऐसे वोटरों को कहे क्या दुनिया ,
इतनी जिल्लत को सहे क्या दुनिया
क्या बताएं दुनिया तुम्हें कि कैसे वोटर होते हैं ,
बिक जाते दारू पैसे पर ऐसे ओटर होते हैं
और 65 परसेंट वोटर ऐसे ही यहां होते हैं,
पहले भूल करके बाद किस्मत पर होते हैं।
21.परी से दोस्ती
1. कितने प्यारे दोस्त हमारे , जब हमसे मिल जाते है ।
सारे गम हो जाते दूर , जब वो मिलने आते है ।
कोई एप्पल, कोई मैंगो , किसी का नाम पंजाबी है
किसी को परी कह के बुलाते , जिसका रंग गुलाबी है |
चार दोस्त की यह कहानी , सब के मन को भाती है
शाम - सवेरे , दिन - दोपहर ,बस उनकी याद ही आती है ।
चारो - चार परी के जैसे , फूलों सा खिल जाते हैं
सारे गम हो जाते दूर , जब वो मिलने आते है |
2.कभी रूठ जाने पर उनके , गम के आंसू रोते है
कभी मना लेने पर उनको , खुशियों के संग सोते है |
कभी - कभी लगता है मुझको , दोस्त मेरे ही जन्नत है
रब से मैंने मांग लिया बस , वो ही मेरी मन्नत है ।
सारे दोस्त खुदा के जैसे , दिल में मेरे आते है
सारे गम हो जाते दूर , जब वो मिलने आते है ।
कितने प्यारे दोस्त हमारे , जब हमसे मिल जाते है
सारे गम हो जाते दूर , जब वो मिलने आते है |
22.ऋतुओं की डोर
1.वर्षा ऋतु जब आ जाते हैं।
नगर में खुशियां छा जाते हैं ।
झूम झूम के गाते हैं सब ,वर्षा ऋतु में नहाते हैं सब
मेलजोल से खाते हैं सब ,प्रेम के गीत को गाते हैं सब
मेंढक टर-टर गाते हैं ,सबको गीत सुनाते हैं ,
वन में मोर लहराते हैं ,
सबको पास बुलाते हैं,
यह सब सबको भा जाते हैं। नगर में खुशियां छा जाते हैं।
2.वर्षा जो हुए सब आम पके
जामुन ना पकने से बच सके
सूखा इस भू पर दिख न सके
मरू भूमि में पानी टिक न सके
सब पेड़ व हरे दिखे
इस देख के कवि कविता को लिखें
कपूर को यह मौसम प्यारा लगे
सब फूल खिले और न्यारा लगे
वारिद जब नभ में आ जाते हैं। नगर में खुशियां छा जाते हैं।
3.रब वर्षा भी करवाते हैं ,
नभ में वारिद मंगवाते हैं।
सब खुशियां खूब मनाते हैं,
वारिस का रंग लगाते हैं ।
वर्षा की बूंदे देखो कब से,
जैसे गिरते सिक्के नभ से।
सोम बारिश हो रहे जब से,
कूप, तालाब भर गए तब से ।
वर्षा की खुशी सब पा जाते हैं ,नगर में खुशियां छा जाते हैं।
वर्षा ऋतु जब आ जाते हैं ।
नगर में खुशियां छा जाते हैं।
कृष्ण कपूर kmg