krishn kapoor kmg ki kavitaye


23.पानी का गुलदस्ता



1.जो काम ना कोई कर सका,वो काम किया है पानी ने।

वो धारी नहीं वो धारा है खुद राह चुना है पानी ने।


पानी का सिर्फ सुबह हुआ है 

कभी हुआ न शाम है ,

जीव जिससे पैदा हुए हैं ,

मां का केवल नाम है  

सबको धरती पर जिलाने का ,काम किया है पानी ने।

वो धारी नहीं वो धारा है, खुद राह चुना है पानी ने।

2. दुनिया में जितने जीव हैं,

 पानी ही सबकी जान है ।

पानी को गंगाजल कहते ,

यही सब की फरमान है ।

चल जाती है इज्जत अपनी,

 एक गिलास के पानी से ।

मच जाता है हाहाकार ,

पानी के सूनसानी से ।


पर सब की लाज बचाने का काम किया है पानी ने ।

वो धारी नहीं वो धारा है, खुद राह चुना है पानी ने ।

3.कहीं पे सूखा पड़ जाता है ,

कहीं पे बाढ़ आ जाती हैं ।

कहीं पे पानी रुक जाता है ,

कहीं पे पानी जाती है ।

पर सभी समस्याओं का समाधान किया है पानी ने।

वो धारी नहीं वो धारा है, खुद राह चुना है पानी ने।

4.जीव जंतु सब गमले हैं ,

दुनिया में खिल के संभले हैं।

पहाड़ काटने वाले ,

जमीन से हार जाते हैं ।

सब मुट्ठी बांधे जाते हैं ,

और मुट्ठी खोले जाते हैं ।

पर पहाड़ को भी काटने का काम किया है पानी ने।

 वो धारी नहीं हो धारा है, खुद राह चुना है पानी ने ।

5.पानी ही जिंदगानी है,

 कहते हैं सभी लोग ।

रस्मो रिवाज में पानी ,

पिलाते हैं सभी लोग ।

सभी रस्म को निभाने का काम किया है पानी ने ।

वो धारी नहीं वो धारा है खुद राह चुना है पानी ने।



24.चरित्र का महत्व 1


1.चरित्र ही स्वाभाव है, 

इसका न मोल भाव है।

चरित्र की अमिट कहानी है।

चरित्र से बनी कहानी है ।


2.चरित्र व्यक्ति का प्रणय है,

यही सभी का निर्णय है ।

चरित्र मानव की जवानी है।

 चरित्र से बनी कहानी है।


3. चरित्र खराब जब होता है ,

दुनिया में सब कुछ खोता है।

 चरित्र शानो की शान है ,

खोने से अपमान है ।

चरित्र को जमीर में लानी है ।

  चरित्र से बनी कहानी है।


4.चरित्र वेदों का वेद है ,

यही मानव का भेद है ।

चरित्र ही जिंदगानी है ,

चरित्र बनी कहानी है ।

5.वैद्यसाला ,प्रयोगशाला यहां होता है,

 चरित्र निर्माण साला कहां होता है 

 इसलिए हमको चरित्र बनानी है ।

 चरित्र से बनी कहानी है ।

        "चरित्र का महत्व" नामक निबंध से लिया गया है ,जो भाग दो में विस्तृत वर्णन किया गया है।




25.चरित्र का महत्व 2

1.चरित्र शहंशाहो का शहंशाह है।

 जिंदगी जीने की एक रहा है। 

जो जैसा चरित्र बनाता है,

दुनिया के सामने लाता है।


2. चरित्र रीतों की रीत है ,

यही गीतों की गीत है।

 चरित्र की गीत जो गाता है।

दुनिया के सामने लाता है।


3. वही इंसान महान है ,

दुनिया की एक शान है ।

जो चरित्र को महान बनाता है।

 दुनिया के सामने लाता है ।


4.चारों वेदों का रावण ज्ञाता ,

तीनों लोक का था वो त्राता।

 परंतु अत्याचार मचाता है ,

दुनिया के सामने लाता है।


5. जब जमीर में गलत भावना आती है,

 इंद्रियां शिथिल हो जाती हैं ।

फिर काम गलत कर जाता है ,

दुनिया के सामने लाता है ।


6.चरित्र से वोट मिलता है ,

नेताओं का दिल खिलता है ।

चरित्र ही आगे बढ़ाता है ,

दुनिया के सामने लाता है।


7.चरित्र से कमाल होता है ,

फिर खूब धमाल होता है ।

चरित्र हंसाता रुलाता है।

 दुनिया के सामने लाता है।


"चरित्र का महत्व" नामक निबंध से लिया गया है ,जो भाग दो में विस्तृत वर्णन किया गया है।


26.नाना के प्रति 



1.मैं भाग्यशाली हूं जग में ,जो आपको मैंने पाया।

    है आपको नमन हमारा ,इस लायक मुझे बनाया ।

कोई ना चुका पाएगा,

जो उपकार किया है तुमने।

 मुझे कोई नहीं दिया है ,

जो प्यार दिया है तुमने । 

है पास कोई न मेरे, 

जिस शब्द से मैं गुण गाऊं।

है कोई ना मेरा सहारा ,

किस विदिस - दिशा में जाऊं।

 मुझे जग की रीत सिखाई ,मुझे धर्म का पाठ पढ़ाया।

 है आपको नमन हमारा, इस लायक मुझे बनाया। 


2.मैं उठाकर सर चल पाऊ, 

मुझे ऐसा शक्ति दिया है।

 कहीं हाथ ना मैं फैलाऊं,

 मुझे ऐसा भक्ति दिया है।

 कभी आपके आंखों से मैं ,

आंसू बन के न गिरूंगा ।

कभी आपका दिल दुख जाए ,

ऐसा ना कभी करूंगा ।

मां बाप के रूप में मैंने ,भगवान को जैसे पाया ।

है आपको नमन हमारा,इस लायक मुझे बनाया।


3.सुख मिलता है चरणों में, 

तू है एक सुख का सागर ।

बड़ा प्रेम भरा है तुझ में ,

तू प्रेम का है इक गागर ।

सब गुण गाते हैं तेरा ,

तेरी है अमिट कहानी ।

पीकर हो गए अमर कितने ,

तेरी चरण धुल का पानी।

 अपने शुभ कर्मों से ,

मेरा जीवन राह सजाया।

 है आपको नमन हमारा ,इस लायक मुझे बनाया ।

मैं भाग्यशाली हूं जग में, जो आपको मैंने पाया। 

है आपको नमन हमारा ,इस लायक मुझे बनाया।



27.जमाने बदलते हैं


1.सबकी नजरों से जमाने बदल जाते हैं।

 बीत गए जो दिन वो फिर नहीं आते हैं।

 कितने मरते कितने जीते हैं ,

जहर जुदाई का पीते हैं ।

 है गर कुटिया तो गम नहीं ,

किसी के महलों से कम नहीं ।

 जो सो गए यहां वह मंजिल नहीं पाते हैं।

बीत गए जो दिन वो फिर नहीं आते हैं ।


2.दुख के बाद सुख आते हैं ,फि

फिरी लोग घबराते हैं ।

मन की कलियां खिल जाएंगी।

 जो चाहोगे मिल जाएंगी।

पर लोग अपने दुख का  गीत ही सुनाते हैं, 

 बीत गए जो दिन वो फिर नहीं आते हैं ।


3.जग में हार-जीत है,

दुनिया की यही रीत है।

 सुख-दुख को सहते रहना तुम ,

मत रुकना चलते रहना तुम।

 मिल जाएंगे सफलता उसे ,जो सफलता लाते हैं। 

बीत गए जो दिन वो फिर नहीं आते हैं ।


4.जो आपके घर में होता है ,

वही सारे डगर में होता है।

 जो पाप यहां पर करता है ,

दुनिया के नजर में रोता है ।

रोते हैं वही यहां जो बुरे जगह पे जाते हैं ।

बीत गए जो दिन वो फिर नहीं आते हैं।

सबकी नजरों से जमाने बदल जाते हैं।

 बीत गए जो दिन वो फिर नहीं आते हैं।


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कृष्ण कपूर kmg


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KRISHN KAPOOR KMG

I am a writer. My First Book (Kalam A Pari) And second book (Pranay ki yatharthta). Village-Savargah, District-Ambedkar Nagar (Uttar Pradesh).

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