Krishn Kapoor Kmg ki Sundar kavita



28.विधवा व अनाथ की जिंदगी



1.विधवा की जिंदगी है जिल्लत उठाना।

अनाथ की जिंदगी है मर जाना ।

 बातों से हालात पे आना ,इधर उधर ठोकरें खाना।


2. विधवा फूल से हुई है कांटे ,

अनाथ के दुख ईश्वर ही बांटे ।

बन जाता दुख का अफसाना ,इधर उधर ठोकरें खाना। 


3.जब दोनों होते हैं अकेले,

तब लगते हैं दुख के मेले ।

लोग इन्हें धिक्कारते हैं ,

गालियां देकर मारते हैं।

पापी बन जाता है जमाना ,इधर उधर ठोकरें खाना।


4.जो विधवा होती हैं ,

अपनी किस्मत पर रोती हैं ।

इसमें रहता है दुख का भंडार, 

कोई नहीं देता है प्यार।

लोग चाहते हैं इन्हें भगाना ,इधर उधर ठोकरें खाना ।


5.बुरी नजरों से देखी जाती है विधवा,

दर-दर की ठोकरें खाती है विधवा।

विधवा सब दुखों की दुख होती हैं,

अपनी किस्मत पे ये रोती हैं ।

इनको पड़ता है दुख को उठाना,इधर उधर ठोकरें खाना।







29.लडको का शोर


1.ये गर्मी का मौसम ये लड़कों का शोर।

 रुके न रुका है लगाने से जोर।

 आती है गर्मी निकलते हैं कपड़े,

 जाती है गर्मी पहनते हैं कपड़े ।

ऋतु में सब बांधे हुए हैं,

 सुख-दुख में सब सधे हुए हैं ।

चार ऋतु के बने हैं डोर ,

रुके न रुका है लगाने से जोर।

 ये गर्मी का मौसम ये लड़कों का शोर ।


2.ठुमुक-ठुमुक के वर्षा आई ,

अपने संग में खुशियां लाई।

 झूम-झूम के बरसे पानी,

 शोर मचाए सब मनमानी ।

आंखों से गिरे खुशियों की लोर ,

रुके ना रुका है लगाने से जोर।

 ये गर्मी का मौसम ये लड़कों का शोर।


3.बसंत के मौसम में चिड़िया चहके ,

फूलों के ढेर बगिया में महके ।

खग उपवन में देखो नाचे ,

ऋतुएं चार बात है सांचे।

 खुशियों का बादल छाए घनघोर।

 रुके न रुका है लगाने से जोर ।

ये गर्मी का मौसम ये लड़कों का शोर।


4. सभी यहां पर झूमे गाए,

 मस्ती में नाचे लहराए ।

मौसम इतना हुआ निराला ,

  वारिद से सब हुआ है काला।

 कोई यहां न काला गोर ।

 रुके ना रुका है लगाने से जोर ।

गर्मी का मौसम है लड़कों का शोर।

रुके न रुका है लगाने से जोर।


         

         30.  मैं उसको ढूंढ रहा हूं।


     1.कहां है फूलों सा रुखसार।

 कहां है गायब मेरा प्यार।मैं उसको ढूंढ रहा हूं।

 कहां है चांद की सी वो रूप,

 जो करती थी रातों को धूप।

 कहां खो गया मेरा रंग,

 रहा करता था जिसके संग ।

बज रहे थे जो दिल में सितार ,मैं उसको ढूंढ रहा हूं ।

कहां है गायब मेरा प्यार,मैं उसको ढूंढ रहा हूं।

2.लिखा में यादों का अफ़साना,

हुआ मै तेरा ही दीवाना ।

कि कहां खो गया मेरा यार ,

मिला न मुझे अभी वो  प्यार ,मैं उसको ढूंढ रहा हूं।

कहां है गायब मेरा प्यार,मैं उसको ढूंढ रहा हूं।

3.मेरा माही है कहां पे खोया,

मैं उसको ढूंढता फिरता रोया।

नज़र आता ही नहीं वो कहीं ,

कोई कहता है वो मेरे तईं।

मै कहता मुझे मिला दो यार ,मैं उसको ढूंढ रहा हूं।

कहां है गायब मेरा प्यार,मैं उसको ढूंढ रहा हूं

  कहां है फूलों सा रुखसार।




      31.जो तुमसे प्यार कर बैठे ।



1.आज इकरार कर बैठे,खुद को बीमार कर बैठे ।

जान जाएगी लगता है ,जो तुमसे प्यार कर बैठे ।

कभी तुमसे वफा की हम

 उम्मीद करते हैं,

 कभी कह भी सके ना हम

 की तुझ पे ही मरते हैं ।

जरा सा भी खबर ना हो सका 

तुझको मेरे हमदम, 

कि तुझको चाहते हैं हम 

कई मुद्दत से ऐ सनम ।

आज दिन ये है कि,आंखें चार कर बैठे ।

जान जाएगी लगता है ,जो तुमसे प्यार कर बैठे।

2. तेरे बिना अगर जीउ ,

तो सब बेकार है माही ।

कहां पे खो गया है तू ,

कहां लाचार है माही।

 एक पल का बिछड़ना भी 

मुझे मुद्दत से लगता है ,

ये आंखें बिन देख तुझको

 पूरी रात जगता है ।

आज हम इश्क की दहलीज पर, सवार कर बैठे ।

जान जाएगी लगता है,कि तुमसे प्यार कर बैठे।


       32. प्रेम पर ही टिका आज संसार है


1.प्रेम पर ही टिका आज संसार है।

तेरा मेरा जो दुनिया में प्यार है।

प्यार दुनिया में सबका सहारा बना,

देखने के लिए एक नज़ारा बना।

प्यार के ही लिए जान चल जाती है,

गर कमी हो तो शान चल जाती है।

प्यार से सबकी बातें स्वीकार है।

तेरा मेरा जो दुनिया में प्यार है।

2.प्यार को सबने माना है पूजा सनम ,

और कुछ भी नहीं इसके दूजा सनम।

प्यार सृष्टि की एक आधार है,

फिर भी सबके नजरों में गुनहगार है।

प्यार से ही बना सबका व्यवहार है।

तेरा मेरा जो दुनिया में प्यार है।

3.प्रेम दुनिया के ऐसे समंदर है ,

की सारी खुशियां इसके अंदर है।

प्रेम से ही अमर सबके विचार है ,

बज रहे दिल में सबके सितार है ।

प्रेम से ही सजे सबके सितार है ।

तेरा मेरा जो दुनिया में प्यार है।

4.प्रेम पर ही सभी अफसाने बने,

प्यार करने वाले सब दिवाने बने।

प्यार करने वालों की यहां मेला है,

प्रेम से हो रहे सब खेला है।

प्रेम ही इस जगत का सार है।

तेरा मेरा जो दुनिया में प्यार है।

5.लोग जहर भी पी जाते है,

 प्यार में मर के जी जाते हैं।

प्यार का वादा सब ही निभाते हैं,

मिटाना पड़े तो मिट के दिखाते हैं।

प्यार दुनिया में ऐसा शिकार है।

तेरा मेरा जो दुनिया में प्यार है।

6. प्रेम को सबने बिजनेस बनाया,

झूठी बातों में सबको फसाया।

स्वार्थ बस लोग प्रेम करते हैं,

अपनी भलाई के लिए सभी मरते हैं।

उसके बाद सब ठहराते गुनहगार है।

तेरा मेरा जो दुनिया में प्यार है।

KRISHN KAPOOR KMG

I am a writer. My First Book (Kalam A Pari) And second book (Pranay ki yatharthta). Village-Savargah, District-Ambedkar Nagar (Uttar Pradesh).

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